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कश्मीर_और_कश्मीरियत
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर जम्मू कश्मीर की छात्रा #जायरा_वसीम को कट्टरपंथियों से मिली धमकियों के बारे में लगातार पोस्ट पढ़ने को मिल रहे हैं । भारत जैसे लोकतंत्र में सच में ये बहुत बड़ी बात है कि एक 16 साल भी उभरती हुई अभिनेत्री को इस प्रकार दबाव में सोशल मीडिया पर #माफीनामा पोस्ट करना पड़ा हालांकि बाद उन्होंने अपनी पोस्ट हटा ली लेकिन जरा सोचिए उस समय उस लड़की की क्या मनोदशा होगी जब उसने लिखा कि "वह #कश्मीरी युवाओं की रोल मॉडल नहीं हैं।"

हम कश्मीर को केवल #आतंकवाद और उसकी सुंदरता के लिए ही नहीं जानते बल्कि इसलिए भी जानते हैं कि पिछले कुछ समय से #कश्मीर से विभिन्न क्षेत्रों में चोटी की प्रतिभाएं भी सामने आई हैं चाहे आईएएस की परीक्षा में टॉप करने वाले शाह फैजल हो या क्रिकेटर मो. शमी और गुलाम रसूल । जायरा भी उसी श्रंखला की अगली कड़ी हैं । #दंगल फिल्म में गीता फोगाट के बचपन की भूमिका निभाने वाली जम्मू कश्मीर की इस छात्रा को अभी हुई 10वीं की परीक्षा में 92% अंक मिलें है जो दर्शाते हैं कि जायरा न केवल एक प्रतिभावान अदाकारा हैं बल्कि एक बढ़िया छात्रा भी हैं ।
इस पूरी घटना का दूसरा पहलू भी है जो कि सोशल मीडिया के दुरुपयोग के रूप में सामने आया है । इससे पहले सोशल मीडिया पर ही कश्मीर की तीन लड़कियों द्वारा शुरु हुआ बैंड "#प्रगाश" भी निशाना बन चुका है और मो.कैफ और मो.शमी का मामला भी अभी ताज़ा ही है ।
जिस कश्मीरीयत के बारे में हम आज तक पढ़ते और जानते आए हैं इन मुद्दों पर हुए बबाल से तो लगता है वो #कश्मीरीयत आज खतरे में है । हमें सोशल मीडिया पर सक्रिय ऐसे लोगों को चिन्हित करना होगा जो प्रतिभा के दम पर आगे बढ़ने वाले युवाओं की राह रोकने और उनका मनोबल तोड़ने का कार्य करते हैं ।
हालांकि कई जानी मानी हस्तीयों ने इस प्रकार की धमकियों की कड़ी शब्दों में निंदा की है और अपना समर्थन जायरा वसीम को दिया है जिनमे अनुपम खेर, स्वरा भाष्कर, श्रद्धा कपूर, जावेद अख्तर और आमिर खान प्रमुख है । यह ऐसे कलाकार हैं जिनको देश में बहुत सारे लोग फॉलो करते हैं और इनकी बात पर ध्यान देते हैं लेकिन गौरतलब बात यह होगी कि वह कट्टरपंथी जो इस छात्रा के खिलाफ सोशल मीडिया में बयान बाजी कर रहे हैं क्या इन सेलेब्रिटियों की आलोचना पर ध्यान देंगे ।
हमारे धर्मनिरपेक्षता का ढोल बजाने वाले नेताओं को ऐसे मुद्दों पर अपनी आवाज उठानी चाहिए और इन मामलों में असदउद्दीन ओवैसी की तरह बयान जारी करनी चाहिए गौरतलब है कि जायरा के समर्थन में बयान देते हुए असदउद्दीन ओवैसी ने कहा कि किसी पर इस तरह का दबाव नहीं डाला जाना चाहिए कि वह क्या करें और क्या नहीं करें । 16 साल की बच्ची को दबाव में माफी मांगनी पड़ी जिसकी जरूरत ही नहीं थी हालांकि ओवैसी ने जायरा के समर्थन में आए लोगों से यह भी कहा कि उन्हें अपनी आवाज तब भी उठानी चाहिए थी जब पैलेट गन से के बच्चों की आंखों की रोशनी चली गई थी और इस तरह उन्होंने जायरा के बहाने अपने असल मुद्दे पर बयान दे दिया । इस मुद्दे पर कुछ समय पहले ही असहिष्णुता का ढोल बजाने वाले आमिर खान का बयान भी गौरतलब है । इन सभी शख्सियतों ने जायरा को जुवानी समर्थन तो दिया लेकिन देखने वाली बात यह होगी कि यथार्थ में किसका समर्थन जायरा तक पहुंचता है ।
अपनी_आवाज_उठाइये_क्योंकि_हमारी_चुप्पी_ही_उन_कट्टरपंथियों_की_ताकत_है_।

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