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"आजादी"

'जुगल हा यही नाम था
, उसका लम्बा तन्दुरूस्त बांका जवान ....
यह कहानी शुरू होती हैं ,
जब वह कालेज के प्रथम वर्ष में था ..जुगल के पिता जी एक बड़े सरकारी ओहदे पर तैनात थे ...
बचपन से ही मां का दुलारा था वह कभी कोई कमी न हुयी उसे तभी तो घर से सैकड़ो किमी दूर शहर में पढ़ने भेजा गया उसे की पढ़ लिख कर वह गांव और देश का नाम रोशन करें ......पहला वर्ष बीत चुका था जुगल का कोई तोड़ न था पढाई में वह कक्षा में अव्वल था ....उसकी भाषा शैली गजब की थी ...ओजपुर्ण लगता जैसे वह किसी बडी पार्टी का प्रवक्ता हो .....द्वितीय वर्ष में जुगल का झुकाव राजनिति की तरफ होने लगा था ....इतिहास में वह मार्क्स और लेनिन से काफी प्रभवित हुआ .....
तभी अचानक से एक दिन जुगल के पिता जी की हत्या की खबर मिलती हैं ,,,,
पिता की मृत्यु से जुगल टूट जाता है ....उसे गांव जाने के सिवा कोई रास्ता नजर नही आता ....वह इसी सोच मे डूबा हुआ था कि किसी शक्स का हाथ अपने कन्धो पर महसूस किया .....यह हाथ जुगल के अग्रेजी के प्रो मि वसीम का था ...मुझे दुख हुआ जुगल यह खबर सुन कर ....उन्होने चश्मे को आंखो से उतारते हुये कहा ....जुगल रो रहा था ....और प्रो वसीम की बाते सुने जा रहा था ...देखो जुगल तुम्हारे पिता की हत्या जानते हो किसने कि ....वह चौंक उठता हैं ....किसने सर .....हमने की तुमने की इस सरकार ने की इस देश मे कट्टरवादी सघंटनो ने की ....तुम बदल सकते हो इसे हा तुम बदल सकते हो ...यह समय रोने का नही लड़ने का है ....टूटो मत लड़ो इस सिस्टम से ...बदलो इसे ताकि तुम्हारी तरहा किसी और के पिता की हत्या न हो कभी ......जुगल को अंधेरे मे एक दीया मिल गया था ...उसके अन्दर दबी हिंसा को कही न कही कुरेदा जाने लगा था ......यस सर....मैं लडूगा इनसे सिस्टम स् लडूगा ...नेताओ से लडूगा ...कट्टरपंथीओ से लडूगा .....सब से लडूगा मैं ....चाहे कितनी भी मुसीबत क्यो न आये मैं पीछे न हटूगा .....अगल दिन कालेज कैम्पस में मोजूदा सरकार के खिलाफ सभा बुलाई गयी ....जिसमे जुगल एक तक्थी लिये सबसे आगे खडा था उस लिखा था ...."हमे चाहिये आजादी"
उस दिन जुगल ने ऐसा भाषण दिया की वामपंथ दल के हर एक सदस्य ने उसकी पीठ ठोकी ....जुगल अब राजनितिक गतिविधियों मे सक्रिय हिस्सा लेने लगा था ..उसके तर्क और भाषा शैली के आगे विपक्ष टिक न पाता ....द्वितीय वर्ष खत्म होते होते ....जुगल कालेज का चुनाव जीत कर ...अपने दल का लीडर बन चुका था ....उसकी लोकप्रियता देख कर बडे बडे मौजूदा विपक्ष के लीडरो ने हाथ मिला लिया उससे .......
समय गुजरता गया ...जुगल इतना आगे निकल चुका था की वह अपना घर गांव माँ सबको भूल चुका था ....अपने ही दल की एक तेज नारीवादी छवि की लड़की के प्रेमजाल मे फंसे जुगल ने एक दिन उसके सामने विवाह का प्रस्ताव रखा .....नो बेबी शादी और इतनी ज्लदी अभी तो मेरा 27 साल चल रहा ...यह सही नही हैं ...जैसा चल रहा चलने दो मै अभी शादी नही कर सकती ....जुगल के जोर देने पर उसने अपनी कुछ शर्ते रखी ...जैसे शराब पीना , कही भी कभी भी आना जाना मतलब उसको किसी भी काम मे रोका न जाये ...मजबूरी मे जुगल यह सब मान गया ...क्योकि वह भी इन्ही सब चीजो के लिये लड़ रहा था ...माहिलाओ को समान अधिकार मिलना चहिये ...यह एक सभ्य समाज की नीव है .....दोनो ने एक निश्चित तारीख को कोर्ट मे शादी कर ली ...जुगल बहुत खुश था ...वह अपनी राजनितिक जिन्दगी मे व्यस्त था और उसकी नई नवेली पत्नी अपना माहिला मोर्चा सम्भालती ....कभी कभी ही दोनो एक साथ घर पर होते ....
बीस साल गुजर गये जुगल की माँ की मृत्यु को प्रोपर्टी का मुकदमा अदालत में हैं ...जुगल आज अपनी पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष हैं उसकी 19 साल की एक प्यारी सी बिटिया है ...जो दिल्ली के एक बडे कालेज मे पढ़ रही ......जुगल की पत्नी की आदते अब चरम पर है ...दिन रात अय्यशी शराब ...दुसरे मर्दो से सम्बध उसके लिये अब शौक बन गया हैं ...जुगल भी अब एक कट्टर वामपंथी है घर कम ही जाता हैं ....पराई लड़कियो की सोहबत लग गयी है उसे पार्टी फन्ड का सारा पैसा उसी के अाधीन रहता हैं ...वह और उसकी बीबी दोनो हाथो से पैसा उडा रहे .....एक दिन जुगल पार्टी मिंटिग मे आये मेहमानो की अवाभगत में लगा हुआ था ...और सबसे जरूरी फरमाईस थी ..एक टिन एज की लड़की जिसके साथ आठ वहसी एक साथ हमबिस्तर हो सके ....जुगल ने यह काम अपनी दिल्ली की माहिला मोर्चा की एक सदस्या को सौप दिया ...था ...रात करीब तीन बजे जब वे आठो मेहमान जाने की तैयारी करने लगे तो जुगल ने सोचा लगे हाथ मै भी मजे ले लु ....आज का दिन तो दौड भाग मे थक सा गया हू ...थोडा राहत मिलेगी ...मेहमानो को कार तक छोड कर जब वह वापस होटल मे दाखिल हुआ ...तो मन ही मन मुस्कुराते हुये होटल के कमरे मे दाखिल हुआ ...उसके सामने ...एक 18-19 साल की जवान लडकी पीठ के बल नग्न खडी थी ...जुगल ने बिना चेहरा देखे ज्लदी से अपने वस्त्रो को खुद से अलग किया और लड़को को बांहो में भर लिया .....नेहा ...उसके शरीर मे एक विघुत का तेज झटका सा लगा ....वह सुन्न सा नग्न अपनी लड़की के आगे खडा था ...और अभी अभी अपनी ही लड़की पर आठ दरिदे छोडे थे उसने ....पापा आप... कमरे में एक घुप सन्नाटा था .... अगले दिन शहर के अखबार की हेडलाइन थी .....प्रदेश की नामी पार्टी के मशहूर नेता ने खुद को गोली मार कर आत्महत्या कर ली ,,,
@अंकित तिवारी

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