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.*...............जय प्रलयंकर जय बम भोले ...............*

महाशिवरात्रि के महा पर्व पर समस्त शिवभक्तों , अभक्तों और कमभक्तों को समर्पित ......

"नर पिशाच कुल के शोणित से ,
अपनी जटिल जटायें धो ले ।
असुर हिमालय तक आ पहुंचे
अब तो नेत्र तीसरा खोले।
जय प्रलयंकर जय बम भोले।।
मानसरोवर जग में न्यारा ।
जो कैलाश तुम्हारा प्यारा ।।
अमर नाथ की गुफा तुम्हारी।
काबिज सब पर अत्याचारी।।
मनुज दलित सब दीन दमित हैं।
देव सभी वलहीन नमित हैं ।।
हुईं अरक्षित हैं महिलायें ।
घर को सकुशल लौट न पायें।।
राम- कृष्ण - शिव - भक्त त्रस्त हैं।
देवालय हो रहे ध्वस्त हैं।।
बस्ती बस्ती बूचड़खाना ।
मुश्किल है अब गाय बचाना ।।
बढ़ा पाप यों धरती डोले ,
अब तो नेत्र तीसरा खोले।
जय प्रलयंकर जय बम भोले।।"

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