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विरोधी और उनका विरोध कैसे हो ।

जो वामपंथी हमेशा Sanghi के साथ Goons जोड़ते ही हैं (ट्रेनिंग ही ऐसे मिलती है, संघी कहा तो अपने आप Goon-गुंडा बोलने की) उनका उल्लेख हमेशा Liar Leftists (झूठे) या Leftie Lech क्यों न करें ? Lech ये lecherous याने लम्पट का शॉर्ट फॉर्म है । हिन्दी में इनका उल्लेख करना है तो इनका उल्लेख किया जाये वहाँ चरित्रहीन या देशद्रोही अवश्य जोड़ा जाये । ये Liar तो होते ही हैं इसलिए संघी के साथ goon जोड़ते हैं लेकिन इन्हें Lech, Liar, Characterless Communist या चरित्रहीन वामी कहने में कोई असत्यभाषण का दोष भी नहीं लगेगा । कभी शुद्ध चरित्र के लोग भी हुआ करते इनमें, लेकिन अपवाद , और उन्हें कोई याद नहीं करता क्योंकि उनके जैसा रहते तो इज्जत पाते । मेरे एक घनिष्ठ मित्र के पिता थे, पहले जुझारू मजदूर नेता थे फिर बुढ़ापे के साथ हाशिये पर रखे गए । फिर भी, बेदाग व्यक्ति थे और इसलिए उनको इज्जत थी । उन्होने भी वक्त का चलन समझकर मिलती इज्जत को ही बेहतर समझा और शांति से जीवन यापन करते रहे अंत तक, सक्रीय रहने की वृथा कोशिश नहीं की।

हो सकता है एकाध अपवाद मिले जो बिलकुल दुश्चरित्र न हो लेकिन झूठ तो होगा ही । Liar Leftie तो लागू ही होगा। हमेशा ऐसे विशेषण लगाते रहें और ज्यादा बदलाव न करें, predictable होना गलत नहीं होता । जब तक वे आप के विशेषण से विचलित होकर उसका खंडन नहीं करते, लगाते रहिए । यह उनके लिए नहीं, औरों के लिए होता है । जैसे रिलीजन ऑफ पीस कहा तो कोई भी इस्लाम का नाम लेता है हालांकि सच्चाई जानते सभी हैं । इसी तरह अगर Characterless Communist या चरित्रहीन वामपंथी कहते रहें तो वो विशेषण उनके साथ चिपक जाएगा । उनको यही गंवारा नहीं होता। वे आप को अच्छा लगे या आप का दिल न दुखे ऐसा कुछ भी नहीं करते, इसलिए offense best defense ये समझ लीजिये ।

ये नाम देने आवश्यक हैं । वा क ई गिरोह हमेशा जिनसे लड़ने का मन बनाया है उन्हें ऐसे नाम देता है जिसके साथ शत्रुभावना जोड़ी जाये । वामी जैसे संघी गुंडे कहते हैं (श्री श्री 100008 दाऊद इब्राहिम का उल्लेख कैसे करते होंगे पता नहीं, मैंने आजतक किसी वामी को उनका नाम लेते ही सुना नहीं। पुराने खयालात की औरतें अपने पति का नाम नहीं लेती, बस यूंही याद आया) । बाकी अन्यों को गणशत्रु , प्रतिगामी, प्रतिक्रियावादी आदि शब्द होते ही हैं । उनकी अपनी इंटरनल गाली revisionist या संशोधनवादी होती है, जिसको पार्टी के मंच पर दी वो खुद को unperson समझ लें । प्रतिगामी, प्रतिक्रियावादी का हम अर्थ देखें तो यही समझ में आता है कि इनसे अलग विचार रखनेवाला । याने अलग विचार इन्हें बर्दाश्त नहीं, वैसा व्यक्ति कम से कम वैचारिक और मौका मिले तो actual हत्या के योग्य है इनकी नजर में ।

देखिये कितने बेशर्म लोग हैं, यही "अभिव्यक्ति की आजादी" के झंडाबरदार कहलाते हैं । इसलिए इनपर "पाखंडी " भी इतना ही फिट बैठता है। अगर कोई वामपंथी अभिव्यक्ति की आजादी पर बोलता मिले तो उसे प्रतिगामी, प्रतिक्रियावादी तथा revisionist या संशोधनवादी क्या होते हैं ये पूछे और बताएं तो सब के सामने बेइज्जत करें कि ये तुम्हारी सोच है तो किस मुंह से अभिव्यक्ति की आजादी की बात करते हो ?ये न बताएं तो आप बताएं सब को लेकिन बेइज्जत करने का अवसर न गवाएँ । और हाँ, आत्मरक्षा की ट्रेनिंग लें या अपने साथ ट्रेंड लोग रखें । ये वैचारिक लड़ाई में तब तक ही मानते हैं जब तक इन्हें जीत की गैरंटी हो । जहां ये हारते हैं, पहले गाली गलौच पे उतरते हैं फिर हाथापाई पर । अच्छा कैमरा मोबाइल साथ रखे और किसी को विडियो उतारते रहने को कहें । ये हमेशा अपने साथ लड़कियां रखते हैं उनका यह भी उपयोग होता है कि हाथापाई के वक़्त वे सक्रीय होती हैं, काफी हिंसक भी होती हैं और ऊपर से खुद ही खुद के कपड़े फाड़कर आप पर इल्जाम लगाती है पुलिस में । इसलिए विडियो जरूरी है । सोशल मीडिया में उसका प्रसार भी करें ।

और हाँ, लड़ाई वही चुने जहां मामला कम से कम बराबरी का हो, या वे भारी हैं तो आप को कुछ ऐसे गुर पता हैं जो आप को जिता सकें । चे गवेरा, Saul Alinsky, Gene Sharp और Srdja Popovic की कृतियों का अभ्यास करें । ये इनके ही वैचारिक हथियार हैं ।

जगीरावाला कमीनापन क्या होता है यह जबतक समझेंगे नहीं, केवल जिगरा लाने से काम नहीं बनेगा।

जगीरा हमेशा जिगरा से जीतता रहेगा।

जगीरा बनें नहीं, लेकिन उसे समझना जरूरी है । ये नाम देखकर खुद सर्च करें, इनबॉक्स में केवल सर्च सही है या नहीं इसपर या उसके संदर्भ समझने पर चर्चा करूंगा, लिंक मत मांगिए , उतना भी आप से नहीं होगा तो रामधीर सिंह आप को उत्तर दे चुके हैं ।

तैश में आ कर गलत लड़ाई न चुनें, पलायन भी ठीक है, आप दुबारा लड़ने के लिए खुद को बचा सकते हैं । यह जरूरी है । अपनी संख्या बचाए रखें, बढ़ाते रहें, कम न होने दें ।

कसाई और वामी का हिसाब लगभग सेम है, इसलिए मैं वाम को नास्तिकीस्लाम कहता हूँ । जहां व्यक्ति को अल्लाह और रसूल का पैदाइशी गुलाम माना जाता है वहाँ आजादी की बात ही बेमानी है । उन्हें सिर्फ अपने तरीके औरों पर थोपने की आजादी चाहिए होती है, और कुछ नहीं । नहीं तो काफिर (ह मुहम्मद को न माननेवाला ), मुशरिक (अल्लाह के इतर अन्य को पूजनेवाला) या मुनाफिक (जिसने इस्लाम कुबूल किया तो था लेकिन अब जिसका मन अलग सोचता है) जैसे शब्द गढ़े और कुरआन में ही पाये नहीं जाते । "शांति का धर्म" ! हुंह । उनकी भी इंटरनल गाली है -बिद 'अत करनेवाला या बिद 'अति । यह भी revisionist या संशोधनवादी का इस्लामी नाम है । उसका एक आधार 33:36 है लेकिन उसके बारे में कोई नारीवादिनी के भी मुंह से एक शब्द नहीं फूटता । वही - पुराने खयालात की औरतें अपने पति का नाम नहीं लेती, बस यूंही याद आया ।

इनसे वैचारिक लड़ाई की उम्मीद सोशल मीडिया पर ही करें । आमने सामने ये विचार की लड़ाई नहीं लड़ते । इसीलिए 'सही इस्लाम की बातें करनेवाले सभी इस्लामी विचारक अमेरिका या कनाडा जैसी जगहों में ही रहते हैं । पाकिस्तान या ऐसे किसी कट्टर इस्लामी देश में नहीं । जहां आमने सामने बात करनी है वहाँ आत्मरक्षा के कड़े इंतजाम रखें । पीठ पीछे वार इनके लिए कोई बुराई नहीं होती, या धोखे से हत्या करना जायज है अगर उससे इस्लाम का विरोधी कम होता है । Asma bint Marwan, Abu Afak, Kab bin Ashraf आदि के किस्से देखें । किसने इनकी हत्या के आदेश दिये थे, पूरी परिस्थिति जानकर भी यह भी देखिये ।

ईसाई मीठी छुरी हैं । वे केवल अन्यों के बारे में दुष्प्रचार करने में मानते हैं और उसके लिए स्थानिक व्यक्ति खरीदते हैं। उनकी गलतियाँ हजारों होती हैं, वे केवल इसी बात को लेकर आश्वस्त होते हैं कि उनके पीछे एक धनाढ्य संगटन है और हिन्दू उनका किसी प्रकार से तगड़ा विरोध नहीं करेंगे । हिंसा से उन्हें भी परहेज नहीं होता । उनका कानूनी तरीकों से विरोध होना चाहिए, गंभीर व्यक्ति चर्चा बढ़ा सकते हैं ।

सब से खेद की बात यह है कि इस काम में कोई सहयोग उपलब्ध नहीं होता या दायित्व लेकर कोई खड़ा नहीं होता, बस आशीर्वाद दिया जाता है । एक दो जगह पर बिना अनुमति लिए सक्रिय होनेवाले कार्यकर्ताओं का अवांछित और अनपेक्षित सरकारी स्वागत हुआ था ऐसे सुना है । यह खबर अपुष्ट है लेकिन हर प्रकार की सावधानी आवश्यक होती है जब व्यक्ति अस्तित्व की लड़ाई लड़ने तैयार होता है ।
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