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बजट पर गणमान्य व्यक्तियों के बीच बहस

शाहनवाज हुसैन –आदडनीय मोदी जी के नेतडत्व में जेटली जी ने जो बाड्सिक बजट पेस किया है वो भाड़त के इतिहास में सुनहडे पन्नो पड़ लिक्खा जाएगा....मैं भाड़तीय जनता पाड़टी की ओड़ से वित्त मंतड़ी जी को ढेड़ साड़ी सुब्कम्नाएं औड धन्यवाद पड़ेसित कड़ता हूँ..
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मुलायम –घन्ना बजअ...किहाओं के रिअं तुम्हाआ बाअ माह कएगा...हमाई भऊ डिम्पअ ने भी कअ जेहि बाअ कई ही.....
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किरीट –तोप्प थाले...तुम लोदों तो तो बथ फोतत ता माल तैईये....पैथे त्या पेल पे उदते हैं....तैक्छ तोई देता नहीं....ताम थब तो तैईये....
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खली – अम्बुजा समेंट दे रेट भी नि घटाए....घार कैसे बणाणा अब.....
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जावेद अख्तर – ऐफा है कि देफ है तो जनता है....जनता है तो इलेक्फन हैं... इलेक्फन हैं तो फरकारें हैं...फरकारें हैं तो उम्मीदें हैं....उम्मीदें हैं तो बजट हैं....बजट हैं तो खर्चे हैं...खर्चे हैं तो उगाही के फोर्फेज हैं...फोर्फेज हैं तो टैक्फेज हैं..... टैक्फेज हैं तो गुफ्फ़ा है.....गुफ्फे फे ही डेमोक्रेफी है....डेमोक्रेफी है तो डेफ है..... देफ है तो जनता है....जनता है तो इलेक्फन हैं...
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किरीट – अबे लोटोमैत ते मॉदल....तू बोलना त्या ताहता है आथिर.....
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जावेद – बफ एफे ही दिल में एक ख़याल ने दफ्तक दी....
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सोनिया जी – भेरोजघारों खे लिए बी ईस भाजट में खोई भी गोशाणा नाही खी गाई.....
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किरीट –तुम दोनों माँ-बेते बेलोददाली की ही बात इथ्लिये तलते हो त्योंती इथ थामे देथ में तुम दोनों थे बला बेलोददाल तोई नहीं है....
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केजरीवाल – बाकी सब ठीक है लेकिन पोलिटिकल पार्टीज 2000 से ऊपर का कैश चंदा नहीं ले सकती....मोदी जी नही चाहते कि हम चुनाव लड़ें....ग्राम परधानी के चुनाव लायक भी नहीं छोड़ा हमें...आखिर मोदी जी चाहते क्या हैं...केवल बिज्जेप्पी का ही शासन रहे....दूसरा कोई चुनाव ना लड़े....पहले ही नोटबंदी से अपनी लगी पड़ी है....ये हिटलरशाही है....मोदी इज अ साइकोपैथ....
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किरीट – धोप्ली ते.....तीसी दौक्टर थे तेक करवा ते देथ ले....थब तुधे ही पादल बोलेंदे.....
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राहुल – मम्मा चिंगम....
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सोनियाजी –छोप्प राहो राखुल.....
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किरीट –हा हा हा हा तू फिल इथ तूतिये तो लेतर आ दई.....इथको धर पर लक्खा तलो.....नहीं तो तिसी म्यूदियम में दे दो....
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मुलायम –इह बाए में मैं माअंईय शअद जी के विचाअ जाअंआं चाहूँआ....
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शरद पवार – भौ....बया.....बट.....
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किरीट – अबे मुलायम थिंद....छलद बाऊ तो वैथे भी बोल नहीं पाते थे .....अब तो पद्म विभूथन बी मिल दया.....अब ये मोदी दी ते थिलाप धन्ता तुछ नही बोलेंदे....
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लालू – हप्प्प.....भप्प्प....बूड्बक...अबे यही ना मोदी का भर्ष्टाचार है....शरद बाबू पर का सुरखाब का पर लगा है....उनसे पुराना हम हूँ राजनीति में...आजतक हमको तो एक्को पुरूस्कार नहीं दिए...
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शाहनवाज – आदडनीय लालू जी..निडास ना हो.....आपके लिए आने वाले वड्ष में नया पुडूस्काड़ तैयाड किया जा डहा है......छद्म विदूषक का...
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लालू – तुम साला बिहाड़ में घुस के दिखाओ अब ज़रा.....गांर तोर डालेंगे तोहरा हम....
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शरद पवार – गा.....म.......दो....
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किरीट – अगल आप थब में थे कीथी तो बजत थमज में नहीं आया हो तो मैं थूदीर तौधरी तो बुलवा ते थमज्वाता हूँ.....
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बस जैसे ही सुधीर चौधरी का नाम लिया.....सभी लोगों अपने ने हाथ खड़े कर दिए....सबने बजट पर अपनी संतुष्टि जताते हुए बजट-प्रशस्ति पत्र पर हस्ताक्षर कर डाले.....बोले घटिया से घटिया बजट झेल सकते हैं लेकिन सुधीर को नहीं.

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