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14 दिसम्बर से 14 जनवरी के समय के लिए पिछले कुछ दिनों से एक नया शब्द यहाँ सुना हूं और सीखा हूं "खरमास" ......... हमारे राजस्थान में इस 30 दिन की अवधि को कहा जाता है "मलमास" ......... इन 30 दिनों में सनातन मान्यता के अनुसार शुभ कार्य वर्जित है ......... सिर्फ मलमास-खरमास में जन्मे बच्चों का नामकरण इसी अवधि में करना अनिवार्य होता है .........

14 जनवरी को मकर सक्रांति का त्यौहार सारे देश में मनाया जाता है ......... हर राज्य में अलग अलग तरह के पकवान बनते है और इस त्यौहार का नाम भी अलग अलग है ......... लेकिन कमोबेश हर प्रान्त में ये त्यौहार वहां की लोक मान्यताओं के अनुरूप मनाया जाता है .........

हमारे राजस्थान में तिल के लड्डू और गुड़-पारे बनते है ......... जिन्हें शक्कर-पारा भी बोला जाता है ......... इस दिन तेल जलाना अनिवार्य होता है ......... हर घर में मोठ की दाल के बड़े (पकौड़ी) बनते और गुड़ के गुलगुले .......... ये अनिवार्य है .......... बेसन की पकौड़ी कम बनती है हमारे यहाँ मोठ की धूलि दाल को भिगो के पीस के उसकी पकौड़ी बनायी जाती है ......... जिसे बड़ा कहा जाता है .......... और खाने में वो बेसन की पकौड़ी से बेहद स्वाद लगते हैं .........

सर्वप्रथम चील और कौवों को खिलाया जाता है ......... आवाज़ लगायी जाती है छत पे खड़े हो के ......... "चील बड़ा काग बड़ा" .......... कुत्ते को खिलाया जाता है ......... भिक्षुकों को खिलाया जाता है ......... अन्न वस्त्र का दान दिया जाता है ......... फिर घर के सदस्य भोजन करते हैं ..........

25 दिसम्बर को क्रिसमस पे दिल्ली के सड़कों पे पाँव रखने की जगह नहीं थी ......... सर पे लाल टोपी लगाये बच्चे बूढ़े जवान महिलाओं पुरुषों की भयंकर भीड़ ......... हिन्दू भीड़ ईसाई भीड़ की अपेक्षा ज्यादा ......... एक होड़ मची थी आधुनिकता के रंग में विदेशी त्यौहार मनाने की .......... हर कोई मनाना चाहता है विदेशी त्यौहार खुद को आधुनिकता के रंग में रँगने को व्याकुल विशाल हिन्दू जन मानस .........

आज 14 जनवरी को दिल्ली की सड़कें आम दिनों की तरह ही है ......... 25 दिसम्बर की तरह कोई भीड़ उत्साह उमंग हर्षोल्लास नहीं ......... हमारा इतना बड़ा त्यौहार है आज .......... कहाँ गया वो क्रिसमस के दिन वाला विशाल हिन्दू जन मानस समझ नहीं पा रहा हूं मैं .........

सिर्फ फेसबुक, ट्विटर सोशल मीडिया आदि पे लग रहा है आज मकर सक्रांति है ......... सब मित्र सखा सखी भाई बहन सेलिब्रेट कर रहे है एक दूजे को बधाइयां दे रहे है .......... पकवानों के सुन्दर चित्र अपलोड कर रहे हैं .........

फेसबुक आदि सोशल मीडिया ने एक मंच दिया है हमें अपनी फीलिंग्स शेयर करने का ......... देशभक्ति और त्यौहार आज डिजिटल हो गया है ......... सोशल साइट्स और इंटरनेट तक सीमित हो गया है .........

दिल्ली की सड़कें भले खाली हो ......... सोशल मीडिया आबाद है ......... बेशक हम सब अलग अलग प्रान्त के हो ......... त्यौहार का नाम और मनाने के तरीके पकवान अलग अलग हो ......... फिर भी दिल है हिंदुस्तानी !!!! .........

#मक्कर_सक्रांति_की_बधाइयां

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