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गाँधी खानदान कि असलियत …..पूरा इतिहास पढ़ें ..मोती लाला नेहरु के पडदादा गंगू (सन 1750) से लेकर राहुल गाँधी


भारत को आजाद हुए 67 साल हो चुके हैं! और इन सालों में ज्यादातर समय तक एक ही वंश ने शासन किया है! वो वंश है भारत के पहले प्रधानमंत्री का!लेकिन आज देश का एक बहुत बड़ा तबका इस खानदान पर सवाल खड़े कर चूका है !


आइये जानते हैं इसी वंश से जुडी कुछ संदेहास्पद बातों के बारे में!कहानी शुरू होती है जवाहर लाल के पड़-दादाओं से! इनमे दो नाम विशेष रूप से लेना चाहूँगा!


एक तो था राज कौल जिसके बाप का नाम था गंगू! गंगू ने सिखों के गुरु गोविन्द सिंह के बेटों को औरंगजेब के हवाले करवा दिया था गद्दारी करके ! जिसके कारन हिन्दू और सिख गंगू को ढून्ढ रहे थे! अपनी जान बचाने के लिए गंगू कश्मीर से भागकर डेल्ही आ गया जिसके बारे में औरंगजेब के वंशज, फरुख्शियर को पता चल गया! उसने गंगू को पकड़कर इस्लाम कबूल करने को कहा! बदले में उसे नहर के पार कुछ जमीन देदी!


दूसरा नाम है गियासुदीन गाजी जो राज कोल की औलाद था! यही था मोतीलाल नेहरु का बाप!अब ये जो गियासुदीन था वो 1857 कि क्रांति से पहले मुग़ल साम्राज्य के समय में एक शहर का कोतवाल हुआ करता था! और 1857 कि क्रांति के बाद, जब अंग्रेजों का भारत पर अच्छे सेकब्ज़ा हो गया तो अंग्रेजों ने मुगलों का क़त्ल-ए-आम शुरू कर दिया!ब्रिटिशर्स ने मुगलों का कोई भी दावेदार न रह जाये, इसके लिए बहुत खोज करके सभी मुगलों और उनके उत्तराधिकारियों का सफाया किया!दूसरी तरफ अंग्रेजों ने हिन्दुओं पर निशाना नहीं किया हालाँकि अगर किसी हिन्दू के तार मुगलों से जुड़े हुए थे तो उन पर भी गाज गिरी!


अब इस बात से डरकर कुछ मुसलमानों ने हिन्दू नाम अपना लिए जिससे उन्हें छिपने में आसानी हो सके!अब इस गियासुदीन ने भी हिन्दू नाम अपना लिया!डर और चालाकी इस खानदान कि बुनियाद से ही इनका गुण रहा है! इसने अपना नाम रखा गंगाधर और नहर के साथ रहने के कारन अपना उपनाम इसने अपनाया वो था नेहरु!(उस समय वो लाल-किले के नज़दीक एक नहर के किनारे पर रहा करता था!)


और शायद यही कारन है कि इस उपनाम का कोई भी व्यक्ति नहीं मिलेगा आपको पूरी दुनिया में!


एम् के सिंह कि पुस्तक “Encyclopedia of Indian War of Independence” (ISBN:81-261-3745-9) के 13वे संस्करण में लेखक ने इसका विस्तार से उल्लेख किया है , लेकिन भारत सरकार हमेशा से इस तथ्य को छिपती रही है !उस समय सिटी कोतवाल का दर्ज़ा आज के पुलिस कमिश्नर कि तरह एक बहुत बड़ा दर्जा हुआ करता था और ये बात जग-ज़ाहिर है कि उस समय मुग़ल साम्राज्य में कोई भी बड़ा पद हिन्दुओं को नहीं दिया जाता था! विदेशी मूल के मुस्लिम लोगों को ही ऐसे पद दिए जाते थे! जवाहर लाल नेहरु कि दूसरी बहिन कृष्ण ने भी ये बात अपने संस्मरण में कही है कि जब बहादुर शाह जफ़र का राज था तब उनका दादा सिटी कोतवाल हुआ करता था!जवाहरलाल नेहरू ने अपनी आत्मकथा में कहा गया है कि उसने अपने दादा की एक तस्वीर देखि है जिसमे उसके दादा ने एक मुगल ठाकुर की तरह कपडे पहने हैं और चित्र में दिखाई देता है कि वह लंबे समय से और बहुत मोटी दाढ़ी रख रहा था, एक मुस्लिम टोपी पहने हुए था और उसके हाथ में दो तलवारें लिए हुए था!उसने ये भी लिखा कि उसके दादा और परिवार को अंग्रेजों ने हिरासत में ले लिए था , जबकि असली कारन का उल्लेख तक नहीं किया! जोकि ये था कि वो लोग मुगलों से जुड़े हुए थे !बल्कि बहाना ये बनाया कि क्यूंकि वो लोग कश्मीरी पंडित थे, इसलिए उनके साथ ऐसा किया गया!19 वीं सदी के उर्दू साहित्य, विशेष रूप से ख्वाजा हसन निज़ामी का काम , इस बात को पूरी तरह साबित करता है कि कैसे उस समय मुगलों और मुसलमानों को परेशानी उठानी पड़ी थी! और हर सम्भावना में नेहरु का दादा और उसका परिवार भी उन दिनों उनके साथ था! जवाहर लाल नेहरु एक ऐसा व्यक्ति था जिसे पूरा भारत इज्ज़त कि नज़र से देखता है! वह निस्संदेह एक बहुत ही ध्वनि राजनीतिज्ञ और एक प्रतिभाशाली इंसान था! लेकिन कमाल कि बात देखिये कि उसके जनम स्थान पर भारत सरकार ने कोई भी स्मारक नहीं बनवाया है आजतक भी!बनवाएं भी किस मुह से! बे-इज्ज़ती जो होगी!इनका कच्चा चिटठा बहार जो आ जायेगा!


कारन में बतला देता हूँ!जवाहर लाल का जनम हुआ था- 77 , मीरगंज, अलाहाबाद में! एक वेश्यालय में!अलाहाबाद में बहुत लम्बे समय तक वो इलाका वेश्यावृति के लिए प्रसिद्द है! और ये अभी हाल ही में वेश्यालय नहीं बना है बल्कि जवाहर लाल के जनम से बहुत पहले तक भी वहां यही काम होता था! हा हा उसी घर का कुछ हिस्सा जवाहर लाल नेहरु के बाप मोतीलाल ने लाली जान नाम कि एक वेश्या को बेच दिया था जिसका नाम बाद में इमाम-बाड़ा पड़ा!\यदि किसी को इस बात में कोई भी संदेह है तो आप उस जगह की सैर कर आयें! कई भरोसेमंद स्रोतों और encyclopedia.com और विकिपीडिया भी इस बात कि पुष्टि करता है!


बाद में मोतीलाल अपने परिवार के साथ आनंद भवन में रहने आ गए! अब ध्यान रहे कि आनंद भवन नेहरु परिवार का पैतृक घर तो है लेकिन जवाहर लाल नेहरु का जनम स्थान नहीं!अब ज़रा इस परिवार के बहुत ही ज्यादा आदरनीय लोगो के चरित्र पर प्रकाश डालता हूँ भारतीय सिविल सेवा के एम ओ मथाई जिन्होंने प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के निजी सचिव के रूप में भी कार्य किया. मथाई जी ने एक पुस्तक “Reminiscences of the Nehru Age”(ISBN-13: 9780706906219) ‘लिखी !किताब से पता चलता है कि वहाँ जवाहर लाल नेहरू और माउंटबेटन एडविना (भारत, लुईस माउंटबेटन को अंतिम वायसराय की पत्नी) के बीच गहन प्रेम प्रसंग था..


ये प्रेम सम्बंद इंदिरा गांधी के लिए महान शर्मिंदगी का एक स्रोत था! इंदिरा गाँधी अपने पिता जवाहर लाल नेहरु को इस सम्बंद के बारे में समझाने हेतु मोलाना अबुल कलाम आज़ाद कि मदद लिया करती थी! यही नहीं, जवाहर लाल का सरोजिनी नायडू की पुत्री पद्मजा नायडू के साथ भी प्रेम प्रसंग चल रहा था, जिसे बंगाल के राज्यपाल के रूप में नियुक्त किया गया था!इस बात का खुलासा भी हुआ है कि जवाहर लाल नेहरु अपने कमरे में पद्मजा नायडू की तस्वीर रखते थे जिसे इंदिरा गाँधी हटा दिया करती थी!


इन घटनाओं के कारण पिता-पुत्री के रिश्ते तनाव से भरे रहते थे! उपरोक्त सम्बन्धों के अतिरिक्त भी जवाहर लाल नेहरु के जीवन में बहुत सी अन्य महिलाओं से नाजायज़ ताल्लुकात रहे हैं!नेहरु का बनारस की एक सन्यासिन शारदा(श्रद्धा) माता के साथ भी लम्बे समय तक प्रेम प्रसंग चला !यह सन्यासिन काफी आकर्षक थी और प्राचीन भारतीय शास्त्रों और पुराणों में निपुण विद्वान थी!


जब उस सन्यासिन ने अपने इस रिश्ते को अवैध से वैध बनाना चाहा और नेहरु के सामने शादी का प्रश्न उठाया, तब नेहरु ने साफ़ जवाब दे दिया क्यूंकि इससे नेहरु के राजनीतिक जीवन पर असर पड़ सकता था ! उनके सम्बन्धों से एक बेटा पैदा हुआ था और वह एक ईसाई मिशनरी बोर्डिंग स्कूल में रखा गया था. उनके जन्म तिथि के लिए 30 मई 1949 होने का अनुमान है. वह अपने शुरुआती साठ के दशक में अब हो सकता है!ऐसे मामलों में convents बच्चे के अपमान को रोकने के लिए गोपनीयता बनाए रखते हैं! हालांकि मथाई बच्चे के अस्तित्व की पुष्टि की,लेकिन कभी कोई प्रयास नहीं किया गया उसे खोज निकालने का! निश्चय ही वह बच्चा एक ईसाई के रूप में बड़ा हुआ होगा जिसे यह नहीं मालूम होगा कि उसका वास्तविक पिता कौन था !अब इस परिवार कि चालाकियों और षड़यंत्र के बारे में संदेह पैदा करने वाली कुछ घटनाओं को याद करते हैं ! नेताजी सुभाष चंद्र बोस और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारत के प्रधानमंत्री के पद के लिए जवाहरलाल नेहरू के प्रतियोगियों में थे और उन दोनों को रहस्यमय परिस्थितियों में मृत्यु हो गई।इन सभी तथ्यों को जानने के बाद, वहाँ बाल दिवस के रूप में नेहरू के जन्मदिन को मनाना कहाँ तक उचित है!? खैर अभी तो पूरा परिवार इन गुणों से भरा पड़ा है!


एस. सी. भट्ट की एक पुस्तक “The great divide: Muslim separatism and partition” (ISBN-13:9788121205917) के अनुसार –जवाहरलाल नेहरू की बहन विजय लक्ष्मी अपने पिता के कर्मचारी सयुद हुसैन के साथ भाग गई. तो मोतीलाल नेहरू जबरदस्ती उसे वापस ले आया और एक रंजीत पंडित नाम के एक आदमी के साथ उसकी शादी कर ली. इंदिरा प्रियदर्शिनी को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में भर्ती कराया गया था लेकिन वहां से बेकार प्रदर्शन के लिए बाहर निकाल दिया गया!.


बाद में उसे शांतिनिकेतन विश्वविद्यालय में भर्ती कराया गया था, लेकिन, रवीन्द्रनाथ टैगोर ने उसे वहां से खराब आचरण के लिए बहर निकाल दिया !शांति निकेतन से निकाले जाने के बाद इंदिरा अकेलेपन से ग्रस्त हो गई ! उसकी माँ की तपेदिक से मृत्यु हो चुकी थी और बाप राजनीति में व्यस्त था! इस अकेलेपन में उसे साथ मिला फ़िरोज़ खान नाम के एक युवक का जो उन दिनों मोतीलाल नेहरु की हवेली में शराब आदि की सप्लाई करने वाले एक पंसारी नवाब खान का बेटा था! फिर महाराष्ट्र के राज्यपाल डा. श्रीप्रकाश ने नेहरू को इस बारे में चेतावनी भी दी थी कि इंदिरा का फिरोज खान के साथ एक अवैध संबंध चल रहा था! फ़िरोज़ खान इंग्लैंड में पढ़ा हुआ एक युवक था जो इंदिरा से बहुत सहानुभूति रखता था! जल्दी ही इंदिरा ने अपना धर्म फिर से बदल लिया और मुस्लिम धर्म अपना कर फिरोज से लंदन की एक मस्जिद में शादी कर ली ! अब इंदिरा प्रियदर्शनी नेहरु का नाम बदल कर मैमुना बेगम हो चुका था! कमला नेहरु इस बात से जल भुन गई ! उधर जवाहर लाल नेहरु भी परेशान था क्यूंकि इससे फिर उसके राजनितिक जीवन पर असर पड़ना था!तो अब जवाहर लाल ने फ़िरोज़ खान को उसका उपनाम बदल कर गाँधी रखने को कहा! और उसे विश्वास दिलवाया कि सिर्फ उपनाम खान की जगह गाँधी इस्तेमाल करो और धर्म बदलने की भी कोई जरुरत नहीं है! यह सिर्फ एक एफिडेविट से नाम बदलने जैसा था! तो फ़िरोज़ खान अब फ़िरोज़ गाँधी बन गया लेकिन यह नाम उतना ही अजीब लगता है जितना कि अगर किसी का नाम बिस्मिल्लाह शर्मा रख दिया जाये !


दोनों ने अपना उपनाम बदल लिया और जब दोनों भारत आये तो भारत की जनता को बेवकूफ बनाने के लिए हिन्दू विधि विधान से शादी कर दी गई!


तो अब इंदिरा गाँधी कि आने वाली नसल को एक नया फेंसी नाम गाँधी मिल गया था!नेहरु और गाँधी ये दोनों नाम ही इस परिवार के खुद के बनाये हुए उपनाम हैं!जैसे एक गिरगिट अपना रंग बदलता है उसी तरह इस वंश ने अपनी गतिविधयों को छुपाने के लिए अपने नाम बदलें हैं!एक सच और क्या आप सब लोग जानते है की अमिताभ बच्चन की माँ तेजी बच्चन का प्रेम प्रसंग भी जवाहर लाल नेहरु के साथ था ………….तेजी उन दिनो इंदिरा गाँधी की प्रिय सहेली थी …और वो आनंद भवन मैं बद्मिल्तन खेलने जाती थी ……………और वंह नेहरु की दृष्टी उनपर पड़ी और वो नेहरु को भा गयी ………कुछ सालो बाद जब उन्हें लगा की अब उनकी शादी करा देनी चाहिए तो उन्हों ने अपने एक सिष्य हरिबंस राइ बचन को बुला कर तेजी के साथ उनकी शादी करा दी ………….और हरिबंस राय बचन को किसी शोध के लिए विदेश भेज दिया दस साल के लिए ……तब तक तेजी नेहरु के साथ ही प्रधानमंत्री आवास मैं रहा करती थीअब बात करते हैं इस परिवार के उस झोल-झाल की जो आपने किसी हिंदी सिनेमा में भी नहीं देखा होगा!कौन किसका बेटा है और किसका बाप कौन है! शायद इन्हें खुद भी नहीं पता होगा! अब इंदिरा गाँधी को हुए दो बेटे!राजीव गाँधी और संजय गाँधी!संजय गाँधी का असली नाम रखा गया था संजीव गाँधी! (राजीव के नामके साथ तुकबंदी वाला, जैसे पहले नाम रखा करते थे लोग !)अब संजीव से संजय बनने के पीछे भी रोचक कहानी है!अब हुआ ये की जो ये संजीव गाँधी था, ये ब्रिटेन के अन्दर कार चोरी के केस में पकड़ा गया और इसका पासपोर्ट जब्त कर दिया गया!


अब इस चालबाज़ औरत इंदिरा गांधी के निर्देश पर, तत्कालीन भारतीय ब्रिटेन के राजदूत, कृष्णा मेनन ने वहां प्रभाव का दुरुपयोग करके , संजीव गाँधी का नाम बदलकर संजय कार दिया और एक नया पासपोर्ट जारी कार दिया! अब संजीव गाँधी संजय गाँधी के नाम से जाना जाने लगा! अब ये गलतफ़हमी भी दूर किये देता हूँ कि इंदिरा गाँधी के दोनों सपूत राजीव गाँधी और संजय गाँधी सगे भाई थे या नहीं ये बात जग जाहिर थी कि जब राजीव गाँधी का जनम हुआ तब इंदिरा गाँधी और उसके पति फिरोज (खान) गाँधी अलग अलग रह रहे थे, लेकिन उनमें तलाक नहीं हुआ था!“The Nehru Dynasty” (ISBN 10:8186092005) किताब में जे. एन. राव कहते हैं कि इंदिरा गाँधी (श्रीमती फिरोज खान) का जो दूसरा बेटा था, संजय गाँधी वो फिरोज खान कि औलाद नहीं था! बल्कि वो एक दुसरे महानुभाव मोहम्मद युनुस के साथ अवैध संबंधों के चलते हुए था!


दिलचस्प बात ये है कि संजय गाँधी की शादी एक सिखनी मेनका के साथ मोहम्मद युनुस के ही घर पर दिल्ली में हुई थी! जाहिर तौर पर युनुस इस शादी से ज्यादा खुश नहीं था क्यूंकि वो संजय कि शादी अपनी पसंद की एक मुस्लिम लड़की से करवाना चाहता था!जब संजय गाँधी की प्लेन दुर्घटना में मौत हुई तब मोहम्मद युनुस ही सबसे ज्यादा रोया था!युनुस की लिखी एक किताब “Persons, Passions & Politics” (ISBN-10: 0706910176) से साफ़ पता चलता है कि बचपन में संजय गाँधी का मुस्लिम रीती रिवाज के अनुसार खतना किया गया था! (खतना-जिसमे उनके लिंग के आगे के कुछ भाग को थोडा सा काट दिया जाता है!)


यह सच है कि संजय गांधी लगातार अपनी मां इंदिरा गांधी को अपने असली पिता के नाम पर ब्लैकमेल किया करता था! संजय का अपनी माँ पर पर गहरा भावनात्मक नियंत्रण था जिसका संजय ने जमकर दुरूपयोग किया! इंदिरा गांधी भी उसकी इन सब बातों (कुकर्मों) को नजरअंदाज करती रही और संजय परोक्ष रूप से सरकार नियंत्रित किया करता था!


एक माँ की ममत्व के लिए कलंकित एक उदाहरण — जब संजय गाँधी कि प्लेन दुर्घंतना के साथ उसकी मौत कि खबर इंदिरा गाँधी तक पहुंची तो इंदिरा गाँधी के पहले बोल थे- उसकी घडी और चाबियाँ कहाँ है!अवस्य ही उन वस्तुवों में भी इस खानदान के कुछ राज छुपे हुए होंगे!


एक बात और, संजय गाँधी कि प्लेन दुर्घटना भी पूर्ण रूप से रहस्यमय थी! संजय गन्दी का प्लेन गोता लगते हुए बिना किसी चीज से टकराए क्रेश हो गया! ऐसा सिर्फ उस स्थिति में होता है जब विमान में इंधन ख़तम हो जाये! लेकिन उस समय का उड़ान रजिस्टर बताता है कि उड़ने से पहले ही टेंक पूरा भरा गया था! और बाद में इंदिरा गाँधी ने अपने प्रभाव का इन्स्तेमाल करते हुए जाँच निशिद्द करदी!


अब संदेह होना लाजमी है या नहीं!दुबारा से श्रीमती इंदिरा गाँधी के प्यार के किस्सों पर आते हैं!केथरीन फ्रेंक की एक किताब “The Life of Indira Nehru Gandhi” (ISBN: 9780007259304) में इंदिरा गाँधी के कुछ दुसरे प्यार के किस्से उजागर होते हैं!


ये लिखा गया है कि इंदिरा गाँधी का पहला चक्कर पहली बार अपने जर्मन के अध्यापक के साथ चला था!


बाद में अपने बाप जवाहर लाल के सेक्रेट्री एम् ओ मैथई के साथ भी उसका प्रेम परवान चढ़ा


फिर अपने योग के अध्यापक धीरेन्द्र ब्रह्मचारी और उसके बाद विदेश मंत्री दिनेश सिंह के साथ इनका प्रेम परवान चढ़ा! पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह ने अपनी पुस्तक “Profile and Letters” (ISBN: 8129102358) में मुगलों के प्रति इंदिरा गांधी का आदर के संबंध के बारे में एक दिलचस्प रहस्योद्घाटन किया! इसमें कहा गया कि जब 1968 में प्रधान मंत्री रहते इंदिरा गाँधी अफगानिस्तान कि अदिकारिक यात्रा पर गयी तब नटवर सिंह उनके साथ एक आई.ऍफ़. एस. अधिकारी के तौर पर गए हुए थे! दिन के सभी कार्यक्रमों के बाद इंदिरा गाँधी सैर के लिए जाना चाहती थी!थोड़ी दूर तक कार में चलने के बाद इंदिरा गाँधी ने बाबर कि दफंगाह को देखने कि इच्छा जाहिर कि! हालाँकि ये उनके कार्यक्रम का हिस्सा नहीं थी! अफगानी सुरक्षा अधिकारीयों ने भी इंदिरा को ऐसा न करने कि सलाह दी, लेकिन इंदिरा अपनी बात पर अड़ी हुई थी!और अंत में इंदिरा उस जगह पर गयी! यह एक सुनसान जगह थी! वह वहां कुछ देर तक अपना सिर श्रदा में झुकाए खड़ी रही! नटवर सिंह वहीँ उसके पीछे खड़ा था! जब इंदिरा गाँधी का ये सब पूजा का कार्यक्रम खत्म हुआ तब वो मुड़ी और नटवर सिंह से बोली कि आज वो अपने इतिहास से मिलके आई है!


किसी को अगर समझ न आया हो तो बता दूँ कि बाबर को ही हिंदुस्तान में मुग़ल सल्तनत का संस्थापक मन जाता है, और ये गाँधी नेहरु का ड्रामा उसके बाद ही शुरू हुआ था!उच्च शिक्षा के कितने संस्थानों के नाम इस परिवार और इनके चापलूसों ने राजीव गाँधी के नाम पर रख दिए, इसकी गिनती करना तो बहुत मुश्किल काम है! लेकिन अपने जीवन में राजीव गाँधी खुद एक कम क्षमताऔर पढ़ाई कमज़ोर था! 1962 से 1965तक उसने ट्रिनिटी कॉलेज, कैम्ब्रिज में एक यांत्रिक अभियांत्रिकी पाठ्यक्रम के लिए दाखिला लिया था!लेकिन उसने डिग्री के बिना कैम्ब्रिज छोड़ दिया क्योंकि वह परीक्षा पास नहीं कर सका.!1966 में अगले वर्ष, वह इंपीरियल कॉलेज, लंदन में दाखिल हुआ , लेकिन फिर से डिग्री के बिना छोड़ दिया!के.एन. राव ने अपनी पुस्तक में साफ़ कहा कि राजीव गांधी सानिया मैनो से शादी करने के लिए एक कैथोलिक बन गया!और उसका नाम रखा गया रॉबर्टो !उसके बेटे का नाम RAUL है और बेटी का नाम BIANCA है!


काफी चतुराई से ही नाम राहुल और प्रियंका के रूप में भारत के लोगों के लिए प्रस्तुत कर रहे हैंव्यक्तिगत आचरण में राजीव बहुत ज्यादा एक मुगल की ही तरह था!


15 अगस्त 1988 पर वह लाल किले से अपने भाषण में बोलता है–हमारा उद्देश्य इस देश को उन ऊँचाइयों पर ले जाना है जहाँ ये 250-300 साल पहले था!(ये तब कि बात है जब औरंगजेब का शासन था,नंबर एक मंदिर विध्वंसक )अब एक और धूर्तता देखिये!भारत में प्रधानमंत्री बनने के बाद ब्रिटेन में हुई एक प्रेस कोंफ्रेंस में राजीव गाँधी ने दावा किया कि वो हिन्दू नहीं बल्कि पारसी है!अब फिरोइज़ खान के पिता (राजीव के दादा) गुजरात के जुनागड़ के एक मुस्लिम महाशय थे! पंसारी का काम करने वाले इस मुसिम से एक पारसी महिला से शादी कि थी उस महिला को इस्लाम कबूल करवा के! शायद यही से ही राजीव ने अपनी ये पारसी होने कि काल्पनिक कहानी घडी! वैसे इसके पुरखों में कोई भी पारसी नहीं रहा! और राजीव का अन्तिकम संस्कार पुरे भारत के सामने हिन्दू विधि विधान से हुआ है!


साला चक्कर क्या है इस परिवार काअब सोनिया गाँधी के चरित्र पर प्रकश डालते हैं! एक मित्र ने मुझे ये कहा इस फोरम में कि हम आज भी अपनी देश कि बहुवों को विदेशी महिला कहते हैं जोकि गलत बात है! अब उस बहु के चरित्र और लक्षणों पर जरा गौर फरमाईयेगा ! !डॉक्टर सुब्रमण्यम स्वामी लिखते हैं कि इस सोनिया गाँधी का नाम अन्तोनिया मायनो था और उसका बाप इटली के कुख्यात फासिस्ट शासन का एक कार्यकर्ता था और उसने रूस में पांच साल के कारावास भोगा!


सनिया गाँधी ने हाई स्कूल से ज्यादा शिक्षा तक प्राप्त नहीं की है!कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय परिसर के बाहर अंग्रेजी का ज्ञान देने वाली एक छोटे से स्कूल लेंनोक्स स्कूल से उसने थोड़ी बहुत अंग्रेजी सीखी और अब उसे ही कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से स्नातक हुआ बताती है!थोड़ी बहुत अंग्रेजी सीखने के बाद उसने कैम्ब्रिज में एक होटल में वेट्रेस का काम किया!


इंग्लैंड में सोनिया गाँधी कि माधव राव सिंधिया के साथ बहुत गहरी दोस्ती थी जोकि उसकी शादी एक बाद तक चली! 1982 में एक बार रात को 2 बजे दोनों एक ही कार में साथ साथ पकडे गए थे जब आई.आई.टी. दिल्ली मेन गेट के पास उनकी कार दुर्घत्नाघ्रस्त हो गयी थी! जब इंदिरा गांधी और राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे , तब प्रधानमंत्री सुरक्षा बल नई दिल्ली और चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर आया जाया करते थे जहाँ से भारत के मंदिर की कीमती मूर्तियां, प्राचीन वस्तुएँ, पेंटिंग्स क्रेट में भरकर रोम भेज दी जाती थी! पहले मुख्यमंत्री और बाद में केंद्रीय मंत्री रहे अर्जुन सिंह इस लूट का पूरा आयोजन किया करते थे! सीमा शुल्क से बचते हुए बिना कोई कस्टम ड्यूटी दिए , इटली में पहुंचा दी जाती थी! ये सारा खजाना सोनिया गांधी की बहन अलेस्संद्र माइनो विंची के स्वामित्व वाली दो दुकानों में मुफ्त के भाव बेच दिया जाता थी जिनके नाम क्रमश एत्निका और गणपति थे! अब ज़रा इस परिवार के अन्दर के षड्यंत्रकारियों और सत्ता हथ्याने की उनकी चालाकियों के बारे में जान लिया जाये! इंदिरा गाँधी को बेशक गोलिया मरी गयी थी लेकिन उनकी मृत्यु उनके दिल या दिमाग को गोलियां द्वारा बेधने से नहीं हुई, बल्कि बहुत ज्यादा खून बह जाने के कारण हुई थी! जब इंदिरा गाँधी को गोली लग चुकी थी तब सोनिया गाँधी ने अजीब व्यवहार करते हुए बजाय इंदिरा को एम्स ले जाने के (जहाँ इस तरह कि घटनाओ से निपटने के लिए प्रोटोकॉल था), बल्कि उसकी विपरीत दिशा में डॉक्टर राम मनोहर लोहिया हॉस्पिटल में ले जाने पर जोर दिया! और बाद में अपना मन बदलते हुए फिर से फैसला बदला और इंदिरा को एम्स लाया गया!इस बीच करीब 24 मिनट बर्बाद हुए!जब एक एक सेकण्ड मौत करीब आ रही हो तब 24 मिनट की कीमत शायद सोनिया अच्छे से जानती थी!


अब ये तो भगवान् ही जानते होंगे कि ये सोनिया की मुर्खता थी या अपने पति को सत्ता दिलवाने के लिए की गयी चालाकी! अच्छा अब जरा इस पर ध्यान दें!


राजेश पायलट और माधव राव सिंधिया प्रधानमंत्री पद के लिए मजबूत दावेदार थे और वे सोनिया गांधी की सत्ता के रास्ते में रोड़ा थे. दोनों की ही रहस्यमय दुर्घटनाओं में मृत्यु हो गई! इस बात की और इशारा करने वाले भी पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं कि माइनो परिवार(सोनिया गाँधी का इटालियन परिवार, जिसमे इटालियन माफिया भी शामिल है ) ने ही राजीव गांधी की हत्या के लिए लिट्टे समुदाय को अनुबंधित किया!आजकल, सोनिया गांधी एमडीएमके, पीएमके और द्रमुक जैसे पार्टियों के साथ राजनीतिक गठबंधन करती है जो राजीव गांधी के हत्यारों की प्रशंशा करने में नहीं शर्माते थे! कम से कम एक भारतीय विधवा तो ऐसा कभी नहीं करेगी!राजीव की हत्या में सोनिया की भागीदारी के लिए एक जांच की जानी चाहिए !


विस्तार से जानने के लिए आप डा. सुब्रह्मण्यम स्वामी की पुस्तक “Assassination Of Rajiv Gandhi — Unasked Questions and Unanswered Queries” (ISBN : 81-220-0591-8) पढ़ सकते हैं!. यह इस तरह के षड्यंत्र का संकेत करती है!अब कुछ राजिव गाँधी के बारे मैं …………….


राजीव गाँधी ने, तूरिन (इटली) की महिला सानिया माईनो से विवाह करने के लिये अपना तथाकथित पारसी धर्म छोडकर कैथोलिक ईसाई धर्म अपना लिया था । राजीव गाँधी बन गये थे रोबेर्तो और उनके दो बच्चे हुए जिसमें से लडकी का नाम था “बियेन्का” और लडके का “रॉल” । बडी ही चालाकी से भारतीय जनता को बेवकूफ़ बनाने के लिये राजीव-सोनिया का हिन्दू रीतिरिवाजों से पुनर्विवाह करवाया गया और बच्चों का नाम “बियेन्का” से बदलकर प्रियंका और “रॉल” से बदलकर राहुल कर दिया गया… बेचारी भोली-भाली आम जनता !अब चलते है राजीव गाँधी के पिता फिरोज गाँधी के इतिहास के बारे मैं कुछ जानने ………………..


अपनी पुस्तक “द नेहरू डायनेस्टी” में लेखक के.एन.राव लिखते हैं….ऐसा माना जाता है कि जवाहरलाल, मोतीलाल नेहरू के पुत्र थे और मोतीलाल के पिता का नाम था गंगाधर ।


यह तो हम जानते ही हैं कि जवाहरलाल की एक पुत्री थी इन्दिरा प्रियदर्शिनी नेहरू । कमला नेहरू उनकी माता का नाम था, जिनकी मृत्यु स्विटजरलैण्ड में टीबी से हुई थी ।


कमला शुरु से ही इन्दिरा के फ़िरोज से विवाह के खिलाफ़ थीं… क्यों ? यह हमें नहीं बताया जाता…लेकिन यह फ़िरोज गाँधी कौन थे ? फ़िरोज उस व्यापारी के बेटे थे, जो “आनन्द भवन” में घरेलू सामान और शराब पहुँचाने का काम करता था…नाम… बताता हूँ…. पहले आनन्द भवन के बारे में थोडा सा… आनन्द भवन का असली नाम था “इशरत मंजिल” और उसके मालिक थे मुबारक अली… मोतीलाल नेहरू पहले इन्हीं मुबारक अली के यहाँ काम करते थे…खैर…हममें से सभी जानते हैं कि राजीव गाँधी के नाना का नाम था जवाहरलाल नेहरू, लेकिन प्रत्येक व्यक्ति के नाना के साथ ही दादा भी तो होते हैं… और अधिकतर परिवारों में दादा और पिता का नाम ज्यादा महत्वपूर्ण होता है, बजाय नाना या मामा के… तो फ़िर राजीव गाँधी के दादाजी का नाम क्या था…. किसी को मालूम है ?


नहीं ना… ऐसा इसलिये है, क्योंकि राजीव गाँधी के दादा थे नवाब खान, एक मुस्लिम व्यापारी जो आनन्द भवन में सामान सप्लाय करता था और जिसका मूल निवास था जूनागढ गुजरात में… नवाब खान ने एक पारसी महिला से शादी की और उसे मुस्लिम बनाया… फ़िरोज इसी महिला की सन्तान थे और उनकी माँ का उपनाम था “घांदी” (गाँधी नहीं)… घांदी नाम पारसियों में अक्सर पाया जाता था…विवाह से पहले फ़िरोज गाँधी ना होकर फ़िरोज खान थे और कमला नेहरू के विरोध का असली कारण भी यही था…हमें बताया जाता है कि राजीव गाँधी पहले पारसी थे… यह मात्र एक भ्रम पैदा किया गया है ।


इन्दिरा गाँधी अकेलेपन और अवसाद का शिकार थीं । शांति निकेतन में पढते वक्त ही रविन्द्रनाथ टैगोर ने उन्हें अनुचित व्यवहार के लिये निकाल बाहर किया था… अब आप खुद ही सोचिये… एक तन्हा जवान लडकी जिसके पिता राजनीति में पूरी तरह से व्यस्त और माँ लगभग मृत्यु शैया पर पडी़ हुई हों… थोडी सी सहानुभूति मात्र से क्यों ना पिघलेगी, और विपरीत लिंग की ओर क्यों ना आकर्षित होगी ? इसी बात का फ़ायदा फ़िरोज खान ने उठाया और इन्दिरा को बहला-फ़ुसलाकर उसका धर्म परिवर्तन करवाकर लन्दन की एक मस्जिद में उससे शादी रचा लीमोतीलाल के दो बदमाश बेटे भी थे जो कि अन्य मुस्लिम महिलाओं से हुए थे जिनके नाम क्रमशः शैख़ अब्दुल्ला और सैयद हुसैन थे ! विजयलक्ष्मी सैयद हुसैन के साथ भाग गईं जो कि रिश्ते में उसका भाई ही था जिससे उसे एक बेटी हुई जिसका नाम था चंद्रलेखा !बाद में विजयलक्ष्मी की शादी आर एस पंडित से की गई जिससे उसे दो बेटियां हुईं (नयनतारा और रीता )जवाहरलाल की शादी तो कमला कौल से हुई,किन्तु जैसा की पहले बताया जा चुका है की उनका श्रद्धा माता नामक एक धार्मिक महिला से भी सम्बन्ध रहा जिससे उसे एक बेटा भी हुआ जो दूर बेंगलोर में अनाथालय में या कोंवेन्ट में छोड़ दिया गया और श्रधा माता लापता हो गईं ! जवाहरलाल के लेडी माउन्ट बेटन से भी सम्बन्ध रहे और भी अन्य कई महिलाओं से संबंधों के कारण अंत में सिफलिस नामक बीमारी से उनका निधन हुआअब आते है कमला कौल की ओर कमला के सम्बन्ध हुए मंजूर अली से जो की मुबारक अली की संतान था (मुबारक अली को आप अभी भूले नहीं होंगे ! या वही हैं जो की मोतीलाल के बॉस और शायद जवाहरलाल के कथित रूप से पिता भी थे ! कमला कौल और मुबारक अली से उत्पन्न हुई इंदिरा प्रियदर्शिनी नेहरु !और कमला कौल का फ़िरोज़ खान (जूनागढ़ वाले नबाब खान का बेटा )से भी सम्बन्ध रहे ! किन्तु सौभाग्य कहें या दुर्भाग्य कोई संतान नहीं हुई ! ये वही फ़िरोज़ खान है जिसका बाद में इंदिरा से निकाह हुआ और उसे मैमुना बेगम बनना पड़ा !शायद यही वो वजह रही होगी जिसके कारण फ़िरोज़ से इंदिरा की शादी का उसने पुरजोर विरोध किया था ! रॉबर्ट हार्डी एन्ड्रूज की किताब ए लैम्प फॉर इंडिया – द स्टोरी ऑफ मदाम पंडित में उस तथाकथित गंगाधर का चित्र छपा है, जिसके अनुसार गंगाधर असल में एक सुन्नी मुसलमान था, जिसका असली नाम गयासुद्दीन गाजी था। आप सोच रहें होगें की ये कैसे पता चला? दरअसल नेहरू ने खुद की आत्मकथा में एक जगह लिखा था कि उनके दादा अर्थात मोतीलाल के पिता गंगा धर थे, ठीक वैसा ही जवाहर की बहन कृष्णा ने भी एक जगह लिखा है कि उनके दादाजी मुगल सल्तनत (बहादुरशाह जफर के समय) में नगर कोतवाल थे। अब इतिहासकारों ने खोजा तो पाया कि बहादुरशाह जफर के समय कोई भी हिन्दू इतनी महत्वपूर्ण ओहदे पर नहीं था। और खोजबीन पर पता चला कि उस वक्त के दो नायब कोतवाल हिन्दू थे नाम थे भाऊ सिंह और काशीनाथ, जो कि लाहौरी गेट दिल्ली में तैनात थे, लेकिन किसी गंगाधर नाम के व्यक्ति का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला (मेहदी हुसैन की पुस्तक बहादुरशाह जफर और १८५७ का गदर, १९८७ की आवृत्ति), रिकॉर्ड मिलता भी कैसे, क्योंकि गंगाधर नाम तो बाद में अंग्रेजों के कहर से डर कर बदला गया था, असली नाम तो था गयासुद्दीन गाजी। मेनका जो कि एक सिख लडकी थी, संजय गाँधी की रंगरेलियों की वजह से गर्भवती हो गईं थीं और फिर मेनका के पिता कर्नल आनन्द ने संजय को जान से मारने की धमकी दी थी, फिर उनकी शादी हुई और मेनका का नाम बदलकर मानेका किया गया, क्योंकि इन्दिरा गाँधी को मेनका नाम पसन्द नहीं था (यह इन्द्रसभा की नृत्यांगना टाईप का नाम लगता था), पसन्द तो मेनका, मोहम्मद यूनुस को भी नहीं थी क्योंकि उन्होंने एक मुस्लिम लडकी संजय के लिये देख रखी थी । फिर भी मेनका कोई साधारण लडकी नहीं थीं, क्योंकि उस जमाने में उन्होंने बॉम्बे डाईंग के लिये सिर्फ एक तौलिये में विज्ञापन किया था । आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि संजय गाँधी अपनी माँ को ब्लैकमेल करते थे और जिसके कारण उनके सभी बुरे कृत्यों पर इन्दिरा ने हमेशा परदा डाला और उसे अपनी मनमानी करने की छूट दी । ऐसा प्रतीत होता है कि शायद संजय गाँधी को उसके असली पिता (मोहम्मद यूनुस ) का नाम मालूम हो गया था और यही इन्दिरा की कमजोर नस थी, वरना क्या कारण था कि संजय के विशेष नसबन्दी अभियान (जिसका मुसलमानों ने भारी विरोध किया था) के दौरान उन्होंने चुप्पी साधे रखी, और संजय की मौत के तत्काल बाद काफी समय तक वे एक चाभियों का गुच्छा खोजती रहीं थी, जबकि मोहम्मद यूनुस संजय की लाश पर दहाडें मार कर रोने वाले एकमात्र बाहरी व्यक्ति थे. हम पिछड़ गए सिर्फ अंग्रेजो की वजह से और उन्ही अंग्रेजो की मानसिकता को देश भर में थोपा नेहरु, संजय गाँधी के कई लड़कियों के साथ सम्बन्ध थे जिनमे एक तत्कालीन मंत्री(मै किसी के नाम का उल्लेख नहीं करुँगी) की पुत्री का नाम प्रमुख था जिसके साथ संजय के सम्बन्ध जग जाहिर थे दोनों सारी सारी रात दिल्ली के होटलों में साथ में दिखाई देते थे पर संजय ने इस लड़की का साथ कुछ दिन मौज मनाई और फिर उसको धुध में पड़ी मक्खी की भांति अपने जीवन से बाहर फेंक दिया उस लड़की ने आत्महत्या कर ली और उस घटना से विचलित हो कर वो मंत्री अपना मानसिक संतुलन ही खो बैठा और पागल हो गया कर फिर मेनका नामक लड़की से इसका प्रेम प्रसंग चला जो इंडियन आर्मी के एक बहुत ही वरिष्ठ अधिकारी की पुत्री थी और इसके साथ भी उसने खूब मौज मनाई जब इसने उसे भी छोड़ना चाहा तब बहुत बवाल हुआ और सेना ने बगावत की चेतावनी दी तब मजबूरन उसकी माँ को मेनका और संजय की शादी करनी पड़ी1992 में, सोनिया गांधी ने अपने इटेलियन नागरिकता को बनाये रखने के लिए उसे रेवाईव किया.

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