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43. " दण्डित हों वे जोकि ,किये जनमत की हत्या ।"
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लोकतन्त्र में जनता द्वारा निर्वाचित दल को अपने घोषणा पत्र के अनुरूप निर्वाध शासन करने का अधिकार होता है । भारत के लोकतन्त्र में शासन की लगाम जनता द्वारा अस्वीकृत और तिरस्कृत अल्पमत दलों के हाथों में रहती है ।जिनका एक मात्र लक्ष्य रहता है सत्तारूढ़ दल को काम न करने देना । गत संसद् के शीतकालीन सत्र में अल्प विपक्षी दलों ने लगातार 20 दिनों तक हंगामा और उत्पात करके संसद् को ठप कर दिया । सरकार द्वारा अनेक जनकल्याणकारी विधेयक पारित होने से रह गए । विपक्षी दल एक ओर संसद् को ठप करके सरकार को काम नहीं करने देते दूसरी ओर संसद् के बाहर शोर करते हैं कि सरकार अपने घोषणापत्र के अनुरूप कोई काम नहीं कर रही है । शायद संविधान निर्माताओं ने इस विषम स्थिति की कल्पना नहीं की होगी ।यदि ऐसा किंचिदपि अहसास रहा होता तो वे निश्चित रूप से इस 'संसदीय प्रणाली' के स्थान पर
'राष्ट्रपति प्रणाली 'स्वीकार करते ।
सारांश यह है कि वर्तमान संसदीय प्रणाली बुरी तरह असफल हो गई है । जनता में अविश्वास तीव्रता से बढ़ रहा है ,जोकि एक सीमा के पश्चात् अराजकता का रूप ले सकता है ।
अतएव इस प्रणाली का 'लोकतान्त्रिक विकल्प राष्ट्रपति प्रणाली' ही है और देश के समस्त ' राष्ट्र् हित चिन्तक बौद्धिक वर्ग 'का प्राथमिक कर्तव्य है कि वे जनता को इसके लिये जागृत करें ।
जिससे इन उत्पाती अराजक गुंडों की छाया से संसद् को
मुक्त किया जा सके ।आज की पोस्ट इसी विचार भूमि पर आधारित है ....

"आये सुनते देश में , है बहुमत को 'ताज ' ।
किन्तु यहाँ व्यवहार में , करे 'अल्पमत राज '।।
करे अल्प मत राज , 'अल्प ' बहुमत पर भारी ।
सत्तादल की साफ , साफ दीखी लाचारी ।।
यदि विपक्ष अनुकूल , तभी संसद् चल पाये !
' बहुमत की सरकार ,विवश 'यह समझ न आये!! "


"हत्या है जनतंत्र की , चर्चा यह सर्वत्र ।
प्रतिपक्षी उत्पात की , भेँट चढ़ा फिर 'सत्र' ।।
भेँट चढ़ा फिर सत्र , व्यर्थ यह हुई 'प्रणाली '।
'चुनो राष्ट्रपति एक ',होंय बेअसर 'बवाली '।।
शासन चले सुचारु ,न कोई चले 'कुकृत्या' ।
दण्डित हों वे जोकि, किये 'जनमत' की हत्या ।।"


विशेष .....
ताज ... शासन करने का अधिकार ।
अल्पमत राज ...एक अजीव विसंगति कि संसद् विपक्ष की
सहमति / अनुमति से हीचल सकती है ।परोक्ष
रूप में शासन की लगाम प्रतिपक्षी अल्पमत
दलों के हाथों में चली जाती है और वे अपनी
अनुचित शर्तों पर सत्तारूढ़ दल को ब्लैकमेल
करते हैं। यदि सरकार ब्लैकमेलिंग में नहींआती
है तो हंगामा और उत्पात करके संसद् को ठप
करके सरकार को काम नहीं करने देते । चूंकि
कांग्रेस के लगभग सभी बड़े नेता सोनिया गांधी
राहुल गांधी ,उनके बहनोई और अन्य तृणमूल
की नेता ममता ,राजद के लालू आदि भरष्टाचार
की जाँच के लपेटे में हैं ।अतः ये अपनी शर्तो
पर सरकार चलने देना चाहते हैं जोकि मोदी
के शासन में सम्भव नहीं हो पा रहा है ।
परिणाम शासन पर अल्पमत भारी पड़ रहा है ।
सत्र .....गत शीतकालीन संसद् का सत्र ।
प्रणाली .... वर्तमान संसदीय प्रणाली ।
चुनो राष्ट्रपति एक .. तात्पर्य राष्ट्रपति प्रणाली से ,जिसमें
जनता सीधे राष्ट्रपति अथवा प्रधानमंत्री को वोट
देकर निर्वाचित करेगी और सरकार को निर्वाध
चलाने के लिये उसके पास वीटो शक्ति रहेगी ।
बवाली ...इस त्रुटिपूर्ण प्रणाली का लाभ उठाकर कतिपय
उत्पाती ,भ्रष्टाचारी अवांछित जनविरोधी बदमाश
जनता को लोभ लालच देकर और आतंकित करके
संसद् में पहुँच में सफल हो जाते हैं और फिर सत्तारूढ़
दल को उत्पात और हंगामा करके काम नहीं करने देते
राष्ट्रपति प्रणाली में इनकी ब्लैकमेलिंग की शक्ति ख़त्म
हो जाये गी और ये बेअसर हो जायेंगे ।
कुकृत्या .... कुकृत्य का स्त्रीलिंग ,सरकार के विरुद्ध साजिश
आदि ।
जनमत ...जनादेश ,जनता के बहुमत द्वारा प्राप्त शासन करने
करने का अधिकार ।


44. "काले खाँ ' से क्रूर , अधिक है सेकुलर 'अमता । "
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संयुक्त वंगाल ( वर्तमान अवशेष वंगाल और वंगला देश )
में 'काली चरण भट्टाचार्य ' नाम का का एक हिंदू नौजवान तत्कालीन हिंदुओं के धार्मिक नेतृत्व की अपमान जनक उपेक्षा से मुसलमान बन गया और वह समकालीन नबाब की एकमात्र वारिस उसकी बेटी का पति होने के कारण वंगाल का शासक बन
गया । इस्लाम स्वीकार करने के पूर्व पत्नी सहित हिंदुओं के
हर धार्मिक मठ में जाकर उसने अपने विवाह को हिन्दू रीति से
सम्पन्न करने की अनुनय विनय की ,किन्तु देश का दुर्भाग्य रहा कि किसी भी मठ ने उसकी प्रार्थना को स्वीकार नहीं किया और वह मजबूरन मुसलमान बन गया ,किन्तु हिन्दू आचार्यों के तिरस्कार से वह् इतना आहत हुआ कि प्रतिशोध में उसने हिंदुओं के विनाश का अविस्मरणीय ऐसा क्रूर अभियान चलाया कि इस्लामी हमलावर तैमूर लंग को भी क्रूरता में मात दे दिया और हिंदुओं के
अमानुषिक दमन के कारण वह वंगाल के इतिहास में "काला पहाड़" के नाम से कुख्यात हुआ । आज वंगाल की वर्तमान मुस्लिम आबादी में 60 प्रतिशत से अधिक उसके द्वारा धर्मान्तरित
मुसलमानों के वारिस हैं ।
आज वंगाल में लगभग उसी स्तर पर हिंदुओं के दमन का अभियान चल रहा है ,परिस्थितियों की भिन्नता के कारण तब वह अभियान घोषित तौर पर चला आज अघोषित रूप में उसी सेकुलर तरीके से "अमता शासन की छत्र छाया "में चल रहा है जिस तरीके से गत तीन दशक से हिंदुओं के समापन का कश्मीर में चलाया गया ,कश्मीर घाटी से हिन्दू उजाड़ा जा रहा और भारत के सेकुलर मीडिया में कभी चर्चा तक नहीं होने दी गई । यदि मेरे जैसे किसी सिरफिरे ने कहीं चर्चा करने का दुस्साहस किया भी
तो उसे सांप्रदायिक घोषित करके उसकी आवाज को दबा दिया
गया और ये कथित " बकरावादी" (अमन चैन के वाहक ) कायरता, निष्क्रियता और मौन की गुफा में प्रवेश कर गये ।
वंगाल आज बिलकुल कश्मीर की राह पर है ।कश्मीर के इस्लामीकरण में लगभग 6 दशक लगे ,किन्तु वर्तमान परिस्थिति में वंगाल के इस्लामीकरण में आगामी दो दशक से अधिक नहीं लगेगा । इसकी पुष्टि में एक उदाहरण पर्याप्त है कि कलकत्ता के एक प्रमुख मौलाना ने वहाँ के भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष को संगसार(पत्थरों से मार मार कर हत्या करने )का फ़तवा जारी कर
दिया है ,अमता शासन की खुली मौन स्वीकृति उस फ़तवा को मिली हुई है । जब महानगर और राज्य की राजधानी का यह हाल है ।तब ग्रामीण क्षेत्रों में इस्लामी आतंक का अनुमान सरलता से लगाया जा सकता है । मोदी जी के आने के पहले केंद्र सरकार का भी सक्रिय समर्थन मिला हुआ था । वह अब मिलना बन्द हो
गया है ।मोदी जी के तीव्र विरोध में नोटबंदी के साथ ही यह भी एक प्रमुख कारण रहा है । आज की मेरी पोस्ट की यही पृष्ठभूमि
है । ......

''अमता बेगम' का रहा ,यह 'सेकुलर ' संकल्प ।
हमको हैं वंगाल में ,करने हिन्दू ' अल्प' ।।
करने हिन्दू अल्प , बढ़ा मुस्लिम आबादी ।
मुस्लिम कर आबाद ,हिन्दुओं की बरबादी ।।
करे हिन्दुजन त्रस्त , लगाकर पूरी क्षमता ।
'काले खाँ ' से क्रूर ,अधिक है बेगम अमता ।।"

"शासन की 'सुख - छाँव ' में ,बहुत बढ़ी 'घुसपैठ '।
' निजी प्रशासन' मान कर ,रहे घुसपैठिये ऐंठ ।।
रहे घुसपैठिये ऐंठ , हिंदु जा रहे उजाड़े ।
जर जमीन को छीन, ज़िहादी झण्डे गाड़े ।।
आतंकी आज़ाद , उन्हें है कोई ' त्रास न '।
राज्य बना कश्मीर , दिखे ज्यों 'मुस्लिम शासन' ।।"


विशेष ......
'अमता बेगम' .. इनका दूसरा नाम सेकुलर 'रज़िया बेगम' है
अमता का अर्थ पूर्व की पोस्ट में स्पष्ट किया जा चुका है
'सेकुलर '... भारत में प्रभावी सरलार्थ होता है राष्ट्र् और
राष्ट्रीयता का विरोध अर्थात् इस्लामवाद।
'अल्प .'.....अल्पसंख्यक अर्थात् हिंदुओं को समाप्त करके
उनको बहु संख्यक से अल्पसंख्यक बनाना ।
'सुख छाँव '....अमता शासन की अनुकूल छत्र छाया में ।
' घुसपैठ .'.... वंगला देश और नेपाल के रास्ते आने वाले
लाये जाने वाले मुस्लिम घुसपैठिये ।जिन्हें स्थानीय
स्तर पर प्रशासन के सहयोग से हिंदुओं को भयभीत
करके और आतंकित करके उजाड़ कर बसाया जा
रहा है । धुलापुर में गत सप्ताह में घटित घटना इस्लामी
आतंक की एक छोटी कड़ी है ।
'त्रास न' ......निर्भय ।
'मुस्लिम शासन '...प्रायः पूरे वंगाल में वैध प्रशासन के समान्तर
मौलाना द्वारा जारी फ़तवों के द्वारा प्रशासन चल रहा है
हद यह हो गई कि अब उन्होनें हिंदुओं को काफ़िर मान
कर उनके विरुद्ध इस्लामी कानून के तहत फ़तवे जारी
करना प्रारम्भ कर दिया है और ग्रामीण अंचलों में मुस्लिम
जिहादियों ने उन्हें अमता शासन के सहयोग से लागू भी
करना शुरू कर दिया है । प्रातः और सायं मंदिरों में प्रायः
घंटे और शंख बजना बन्द कराया जा चुका है ।


45. "घरखा' 'कुतिया ' के रहे ,'कुतुआ' 'ख़सम ' अनेक ।

'' शठे शाठ्यं समाचरेत् ।" अर्थात् दुष्ट के साथ दुष्टता और सज्जन के साथ सज्जनता का व्यवहार करना उचित है । ..........' नीति वाक्य "

" मनुष्य को यथायोग्य व्यवहार करना चाहिये ।" (अर्थात् दुष्ट के साथ दुष्टता और सज्जन के साथ सज्जनता का व्यवहार ) ............... "महर्षि स्वामी दयानन्द "

"सज्जन के साथ दुष्टता का व्यवहार पाप है ,किन्तु दुष्ट के साथ सज्जनता का व्यवहार महापाप है ।" ..........."डॉ अशोक शुक्ल ( पोस्ट कर्ता स्वयं )"

कतिपय स्वान धर्मी पत्रकार /जर्नलिस्ट सामान्य भाषा में कुतिया -कुत्ते नक्सली और इस्लामी आतंकवाद ,कश्मीरी अलगाववाद को अनेकविध महिमामंडित करते रहते हैं ।भारत
और भारतीयता के प्रत्यक्ष-परोक्ष शत्रु आजकल प्रधानमंत्री मोदी जी की नीतियों और उनके कार्यों के विरुद्ध निरन्तर अभियान
चलाये हुये हैं । मोदी जी के नेतृत्व में भारत की बढ़ती हुई ताकत से इनकी और इनके संरक्षक - स्वामियों ( चीन पाक) की नींद हराम हो गई है । आजकल नोटबंदी के विरुद्ध जनता को भड़काने में रात दिन एक किये हुये हैं ।
ऐसे राष्ट्रद्रोही गद्दारों की खबर आज की पोस्ट में ली गई
है । 'चोर की दाढ़ी में तिनका ' शैली का प्रयोग किया गया है ।अब
यदि चोर अपनी ढाढ़ी खुजलाते हुये पकड़े जाते हैं ,तो मुझको इससे प्रसन्नता ही होगी क्योंकि मेरा लक्ष्य भी तो यही है ।

"घरखा' 'कुतिया ' के रहे ,'कुतुआ' 'ख़सम ' अनेक ।
अमरीकी बुलडॉग कुछ , देशी नस्ल कुछेक ।।
देशी नस्ल कुछेक , उन्हें जब 'यूज' कर लिया ।
अगला पकड़ा जोकि, उसे भी 'फ्यूज़' कर दिया ।।
काले इसके काम , दिखे जब इसको परखा ।
' मोदि- फ़ोबिया '-ग्रस्त , भौंकती रहती घरखा ।।

" घरखा के पुंल्लिंग हैँ , 'कतिपय' 'खबर -नबीस' ।
उनमें से ही एक है , जिसका नाम 'खबीस '।।
जिसका नाम खबीस, कर्म से ' कलमी - कुत्ता ' ।
इसका साथी वही , जोकि है 'कूकुरमुत्ता ' ।।
पत्रकार कुख्यात , चलाता उलटा चरखा ।
कुछ कुतिया भी संग, रहीं जैसी है घरखा ।।"


विशेष ...
'घरखा '...अपने घर ( समाज ,राष्ट्र ,पति आदि ) को
ही खा जाने वाली ।
'कुतिया '..संस्कृत के कुत्रिया का तद्भव , कुत्ता का स्त्रीलिंग
' कुतिया ' ।
'कुतुआ' ...कुतिया का पुंल्लिंग अर्थात् कुत्ता ।
'स्वान' ....कुत्ता ।
' ख़सम '...पति ,प्रेमी ( निंदात्मक अर्थ में ) ।
'यूज'..... ?
' फ्यूज़ '...?
'कलमी - कुत्ता '...?
' मोदि -फोबिया'.. 'हैड्रोफोबिया' की तरह का एक बहुत ही
ख़तरनाक ,प्राणघातक संक्रामक रोग जोमोदी के
निंदकों को लग जाता है और पीड़ित व्यक्ति पागलों
जैसी हरकतें करता अहर्निश भौंकता रहता है ।
'कूकुरमुत्ता' .. 'कुकुरमुत्ता 'भी , यहाँ व्यंजित अर्थ कुतिया
के 'पिल्ला 'से है ।





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