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10. " एक शायर की ख़तरनाक क्रिया पर प्रतिक्रिया "
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क्रिया ......
"लोग सड़कों पे गर उतर आयेंगे
बादशाहत भी हार जायेगी ।"

.....................यूसुफ राईस

प्रतिक्रिया ....
"गद्दारों की जमात यदि ,
सड़कों पर उतर आयेगी ।
सच मानो वह निश्चित ही,
गुजराती मार खायेगी ।।"

.........डॉ अशोक शुक्ल


10. (ब) . "नर पिशाच हैं वही ,चीखते करुणा -विगलित ।"
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एक भट्टा मालिक को मैं व्यक्तिगत स्तर पर जानता हूँ , जिनकी गणना एक दल के बड़े नेताओँ में होती है ।उनके भट्टे पर

मजदूरों को बंधक बनाकर रखा जाता था और 12,12 घंटे
अत्यधिक क्रूरता से मजदूरों से काम लिया जाता था ।मजदूरी के
नाम पर पूरा पेट भोजन भी मुश्किल से दिया जाता था । यदि कोई मजदूर अपनी पूरी मजदूरी के लिये विशेष आग्रह करता था ,तो उसकी निर्ममता से कोड़ों से इतनी पिटाई की जाती थी कि वह अधमरा होकर उनके पैरोँ पर गिरकर माफ़ी मांगता था तब उसकी
पिटाई बन्द की जाती थी । इसी प्रकार उनके अन्य भी अनेक ज्ञात अज्ञात धंधे चल रहे थे ।इस प्रकार क्रूर शोषण से उन्होने अरबों की काली कमाई एकत्र की हुई है ।
आजकल नोटबंदी के आदेश से सबसे
ज्यादा गरीबों ,मजदूरों की कठिनाईयों और कष्टों से वही करुणा विगलित होकर मोदी जी के खिलाफ चीख चिल्ला रहे हैं । नोट बन्दी के आदेश के विरोधियों की 'कच्ची कथा ' प्रायः यही है ।
इसी पृष्ठभूमि में मेरी काव्यात्मक प्रतिक्रिया प्रस्तुत है .......

"करुणा -विगलित अधिक ही ,दिखें 'कुटिलअवधूत'!
'जनगण' को जो नोचते , रहे बने यमदूत ।।
रहे बने यमदूत , विवश मजदूर निचोड़े ।
मजदूरी की माँग , किये तो मारे कोड़े ।।
यों शोषण से किये , कमाई काली 'अतुलित' ।
नर पिशाच हैं वही , चीखते करुणा-विगलित ।।"


विशेष ......
कुटिल अवधूत .... क्रूर नर पिशाच ,जो मजदूरों ,वंचितों
के श्रम और इज्जत का निर्ममता पूर्वक
शोषण करते रहते हैं ।मानवीय भाषा में
समाजिक बहिष्कार केपात्र हैं ,तंत्रशास्त्र
में एक वाम मार्गी क्रूर संप्रदाय ।
अतुलित ..... अकूत ,अरबों खरबों की सम्पत्ति
जन गण ....सामान्य जनता


11. "मोदी ही हैं ' काल' ,कहें सब सेकुलरवादी ।"
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"सेकुलरवादी खोज ने ,पहिचाना इक रोग ।
नोट बंद जब से हुये ,मरे तभी से लोग ।।
मरे तभी से लोग ,न पहले कभी मरे थे।
सभी 'अमर' खुशहाल ,स्वस्थ साफ सुथरे थे ।।
क्रूर मोदियाघात ,मौत लाया बरबादी ।
मोदी ही है' काल ' ,कहें सब सेकुलरवादी।।"
विशेष ......
भारत और भारतीयता की चर्चा मात्र से जिन्हेंcurrent
के शॉक लगने लगते हैं ,जो धर्मनिरपेक्ष अर्थात् मजहब
सापेक्ष ( माओवादी और इस्लामवादी ) हैं ।


12. "गद्दारों के हौसले ,हुये एकदम पस्त "
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" गद्दारों ' के हौसले , हुये एकदम पस्त ।

चीन पाक के दास जो, दीखें व्यग्र समस्त ।।
दीखें व्यग्र समस्त , दुहत्था जो हैं लूटे ।
जितने काले काम ,न कोई इनसे छूटे ।।
उतर गये इक साथ ,मुखौटे इन यारों के ।
असली चेहरे दिखे ,देश के गद्दारों के ।।"
विशेष ....
नक्सली ,ज़िहादी आतंकवादी और उनके प्रत्यक्ष -परोक्ष
समर्थक ,शत्रु राष्ट्रों के साथ सांठ- गाँठ करके भारत के नेतृत्व
को कमजोर करने और मोदी को हटाने ( हत्या करने की
की हद तक ,मोदी जी ने इस साजिश का गोवा की एक
सभा में स्वयं खुलासा किया ) का अभियान चलाने वाले ,
बड़े नोटों की बन्दी से स्वयं की सामान्य जनता का खून चूस
कर जमा की गई अरबों खरबों की काली कमाई के एकदम
नष्ट अथवा जप्त होने एवं कानूनन दण्डित होने से डरे
बौखलाए नकली जनसेवी ,जन नेता , शत्रुओं के क्रीत दास
मीडिया के लोग एकजुट होकर जनता को भड़का कर
देश में अराजकता पैदा करने और फ़ैलाने में लगे लोग । इस
प्रकार किसी भी रूप में देश के विरुद्ध प्रत्यक्ष अथवा
परोक्ष साजिश में लिप्त देश के शत्रुओं को कुलमिलाकर
हिन्दी भाषा में एक ही उपयुक्त शब्द "गद्दार" प्रयुक्त होता है ।


१२.ब. "मुद्रा बन्दी से खुला , काश्मीर का खेल ।"
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यह रचना वस्तुतः कल लिखी गई थी ,किन्तु किन्ही निजी व्यस्तताओं के कारण फेसबुक पर नहीं आ पाई ।उसे आज पोस्ट किया गया है ।नोट बन्दी के बाद एक तथ्य उजागर हुआ है कि कश्मीर घाटी के बैंको में चलन में लगभग आधी मुद्रा गत दशक में पाकिस्तान से आई जाली है ।

इसी पृष्ठभूमि में निम्न पोस्ट को समझा जाये ....

" मुद्रा -बन्दी ' से खुला काश्मीर का 'खेल' ।
क्रूर ज़िहादी जंग पर ,सहसा लगी नकेल ।।
सहसा लगी नकेल , 'गाजियों 'के 'सपने' पर ।
दुष्ट अराजक सिमट ,गये अपने अपने घर ।।
आधी मुद्रा मिली , वहाँ जाली 'छल -छंदी' ।
गद्दारों को खले , इसलिए मुद्रा - बन्दी ।। "
विशेष ....
मुद्रा- बन्दी ....5 सौ और एक हजार के नोटों की बन्दी ।
खेल ......काश्मीर में गत कई दशकों से चल रहे अराजक
आतंकवादी अभियान ,जिसमें अब तक 50 गैर
सुन्नी मुस्लिमों की हत्या की जा चुकी है और
उन्हें उजाड़ा जा चुका है ।इस नरमेध को देश
के सेकुलर दलों और बुद्धिभक्षियों का सक्रिय
समर्थन प्राप्त रहा है । आज कश्मीर बिलकुल
हिन्दू विहीन हो चुका है ।वहाँ इस्लामी आतंकियों
का एक छत्र साम्राज्य कायम हो चुका है । इस
इस इस्लामी करण को संचालित करने में पाक
से आये जाली नोटों की विशेष भूमिका रही है ।
नोटबंदी से जिहादी और उनके ' हेजरी ' और
'अमता' जैसे समर्थक सहयोगी अत्यधिक क्षुब्ध
और बौखलाए हुये हैं । यही 'काश्मीर का खेल'
रहा है ।
गाजियों .. गाजी का बहुवचन ,गाजी उन इस्लामी योद्धाओं
को कहा जाता है ,जो काफिरों को कत्ल करने
उन्हें समाप्त करने के लिये इस्लामी देश (पाक)
से आते हैं ।
सपने ....सम्पूर्ण भारत के क्रमशः टुकड़े टुकड़े करके
सेकुलरों के प्रत्यक्ष परोक्ष सहयोग से इस्लामी
करण( जोकि गत एक शताब्दी से निरन्तर निर्बाध)
का सपना ,मोदी के नोट बन्दी से इस जिहादी जंग
को भारी आघात लगा है ।
छल-छंदी .... ज़ाली मुद्रा के संचालन में समाहित सभी
छद्म ,कपटपूर्ण गतिविधियाँ ।
गद्दार ..... पिछली पोस्ट में स्पष्ट किया जा चुका है ।



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