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31. दिनांक 08 .12.2016 , नोट बन्दी के विरोध में काला दिवस में

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"जब लोकसभा में नोटबंदी पर बोलूंगा ,तो भूकम्प आ जायेगा"
और
"मोदी मेरे प्रश्नों से डरते हैं ,इसीलिये भागे हुये रैलियाँ कर रहे हैं"  ............'.कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गान्धी '

दिल्ली में दिनान्क 08.12.2016 को समस्त सेकुलर दलों द्वारा नोटबंदी की वापसी के लिये अर्थात् काले धन के समर्थन में आयोजित प्रदर्शन के अवसर पर राहुल गांधी के भाषण के कुछ अंश और इन पर मेरी प्रतिक्रिया ......


"बोले संसद् में अगर ,राहुल जी के बोल ।
झटके ऐसे लगेंगे ,धरा उठे गी डोल।।
धरा उठेगी डोल , अतः ' सोये रहते' हैं ।
"मुर्ख मौन ही श्रेष्ठ, दिखे "ऋषि यह कहतेहैं ।।
संसद् ठप क्यों किये, राज जनहित में खोले ।
आ जाता भूकम्प ,न संसद् चली ,न बोले ।।''


"भागे मोदी फिर रहे ,राहुल जी से 'भीत'!
संसद् के शास्त्रार्थ में ,नहीं सकेंगे जीत ।।
नहीं सकेंगे जीत ,सरस्वती सिद्ध इन्हें है ।
माँ काभीआशीष, 'वाक् की सिद्धि'जिन्हें है।।
ठहर सका है कौन ,अभी तक इनके आगे?
बोले यह हैं जहाँ ,लोग सब डर कर भागे।।"
विशेष .....
''सोये रहते ''..गत लगभग एक दशक से अधिक अवधि
से राहुल गान्धी संसद् सदस्य के रूप में बहुत कम


उपस्थित रहे हैं और जब भी उपस्थित रहे तो प्रत्येक
बहस के अवसर पर प्रायः सोते हुये ही पाये गये ।
"मुर्ख मौन ही श्रेष्ठ ,दिखे ".... 'मूर्खोsपि शोभते तावत्
यावत् किंचिन् न भाषते ' अर्थात् मूर्ख तभी तक
सुशोभित रहता है जबतक कि वह बोलता नहीं है ।
" भीत "....डरे हुये ।
" वाक् की सिद्धि ".....राहुल जी की 'माता श्री ' को
वाक् की सिद्धि प्राप्त है , वह 'भाषण कला '
में इतनी प्रवीण रही हैं कि जीवन में अभी तक वह
' सदैव रोमनमें किसी अन्य के द्वारा पूर्व लिखित हिन्दी
भाषण को पढ़ती रही हैं ,ऐसी माँ का उन्हें स्वाभाविक
आशीर्वाद भी प्राप्त रहा है । अतएव उनकी विद्वत्ता और
भाषा की सम्मोहन शक्ति वहुगुणित हो गई है ।


32. "तीन तलाक मुस्लिम औरतों के साथ क्रूरता है" ..

" तीन तलाक के मामले में मैं अपनी मुस्लिम बहिन बेटियों के साथ अन्याय नहीं होने दूँगा ।'' .................प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी
"शरियत संविधान के ऊपर नहीं है ।" ..............इलाहाबाद हाई कोर्ट के निर्णय से
"शरीयत हमारे लिये सर्वोपरि है ......शरियत के खिलाफ यदि 'वे( केंद्र सरकार ,कोर्ट के निर्देश पर भी ) कानून बनायेंगे तो हम उसे तोड़ेंगे ।" ................मौलाना अशद मदनी

तीन तलाक ,हलाला ,मुताह को मैं सदैव से अमानवीय और मुस्लिम बहिन ,बेटियों के साथ पशु हिंसा से भी अधिक क्रूरता
मानता रहा हूँ और अन्याय ,अत्याचार को मैं कभी भी किसी समुदाय विशेष का निजी मौलिक अधिकार नहीं मानता रहा हूँ ।
इसी पृष्ठभूमि में मेरी आज की पोस्ट प्रस्तुत ह है और 'कथित सेकुलर प्रगतिशीलों 'की प्रतिक्रिया विशेष रूप से
आमंत्रित कर रहा हूँ ,वैसे मैं पूर्व के उनके इतिहास से जानता हूँ
कि वे इन मुद्दों पर या तो "इस्लामी मर्दवाद '' के पक्ष में विभिन्न
कुतर्कों के साथ खड़े दिखाई देंगे अथवा "मौन की गुफा में " घुस
जायेंगे ,क्योंकि ये अय्याशों भोगवादियों की एक संगठित जमात रही है और जो भी अय्याश होता है ,वह कायर और क्रूर होता है .....

"हिस्सा ' शरियत' के रहे ,बेशक 'तीन तलाक' ।
इस्लामी कानून में , मर्दों की है ' धाक ' ।।
मर्दों की है धाक , 'हलाला ' भी जायज है ।
और ' मुताह ' समेत ,नहीं कुछ नाजायज़ है।।
जो भी छेड़े इन्हें , बने 'तारीख़ी किस्सा' ।
मेरा वही विधान ,जोकि शरियत का हिस्सा।।"

" पहले मुस्लिम अन्त में' ,हम मुस्लिम विख्यात ।
शरियत को जो छेड़ दे ,है किसकी औकात ??
है ' किसकी औकात ', जोकि दे हमें चुनौती ।
सारा मुल्क ,जहान , हमारी 'रहे बपौती' ।।
संविधान कानून ,कहे चाहे जो कह ले ।
शरियत ही सम्मान्य ,हमें है सबसे पहले ।।"
विशेष ....
" शरियत ..". इस्लामी विधि व्यवस्था ,जो 'मर्दवाद ' को
को मान्यता देती है ,औरत को सभी मौलिक
अधिकारों से वंचित करती है ।
"तीन तलाक ..''.. किसी भी अवस्था में किसी भी इकतरफा
तलाक ,तलाक ,तलाक कह कर स्त्री को उसके
जीवन निर्वाह के सभी साधनों से वंचित कर देना
और बच्चों सहित उसे घर से तत्काल वाहर करके
भीख मांगने अथवा वेश्यावृत्ति के लिये मजबूर
कर देना ।
"हलाला ..'... तीन तलाक के द्वारा हलाल हुई महिला यदि
अपने पति से उसकी सहमति से पुनः विवाह
विवाह करना चाहे ,तो उसे दूसरे पुरुष के साथ
( प्रायः मुल्ला काजी के साथ ) निकाह करके
विधिवत यौन सम्बन्ध स्थापित करना पड़ता है
और उसके तलाक देने के पश्चात् ही वह अपने
पति के साथ पुनः विवाह कर पाती है ।
" मुताह .."... तदर्थ विवाह ,यह कुछ घण्टो या कुछ दिनों के
लिये ही होता है इसका बेहद दुरुपयोग हो रहा है,
जितने भी देश विदेश अय्याश पैसे वाले हैं ,वे
ग़रीब मुसलमानों की बेटियों को भारी धन देकर
मुताह करके मन माना यौन शोषण करके कुछ
घंटों या दिनों के बाद 3 तलाक देकर उनको
अगले अय्याश शिकारी के लिए छोड़ देते हैं ।
कुलमिलाकर 'बंधुआ वेश्यावृत्ति 'का विधिसम्मत
रूप।
"तारीख़ी किस्सा '.एक प्रकार से धमकी अर्थात् जिन्होंने भी उक्त
व्यवस्था के विरोध में प्रभावकारी ढंग से खड़ा होने
का दुस्साहस किया ,उनको सबको समाप्त करके
' इतिहास की किंवदन्ती ' बना दिया गया ।
" पहले मुस्लिम अन्त में ..".संक्षेप में मुसलमान केवल और केवल
मुसलमान है , उसे किसी भी राष्ट्र् की राष्ट्रीयता
किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है ।
"किसकी औकात" ..सन्देश स्पष्ट है कि यदि सुप्रीम कोर्ट अथवा
सरकार ने दुस्साहस किया ,तो उस निर्णय की हम
1986के शाहबानों के गुजारा भत्ता वाले निर्णय जैसी
बेइज्जती और दुर्गति करेंगे ।
" सारा मुल्क ,....रहे बपौती " .... इस्लाम के अनुयायियों का
यह दावा रहा है कि भारत सहित सारे विश्व पर
इस्लाम का साम्राज्य स्थापित करने के लिये आये हैं।
काफिरों अर्थात् गैर मुस्लिमों को अंतिम रूप से
समाप्त करके सारे पृथ्वी पर इस्लामी साम्राज्य
स्थापित करना प्रत्येक मुसलमान का अनिवार्य फर्ज
है । इकवाल ने बड़े ही फख्र के साथ घोषणा की थी
कि .....
" मुस्लिम हैं वतन है ,सारा जहाँ हमारा ।"
" सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा ", 'कथित कौमी
तराना " का अंतिम शेर ।
धाक .... वर्चस्व ।


33." पी.एम. कहें गरीब , सभी हैं मेरे पाले ।"
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" दो चार महीने में जेल में होंगे काले धन वाले लोग "
"अब बच नहीं पायेंगे बेईमान लोग "
" लेकिन ईमानदार लोगों के आशीर्वाद से हम इस जंग को
जीतेंगे "
..............' प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ' '11.12.2016 को सम्बोधित जनसभा के अंश '

" काले मन बेइमान सब ,दिखें हो रहे फेल ।
बहुत शीघ्र गद्दार ये , जायेंगे सब जेल ।।
जायेंगे सब जेल , कहे 'पी.एम '. रैली में ।
चिल्लाते हैं वही , जोकि 'काली टेली 'में।।
'ब्लैक मनी' ना बचे , कहीं भी उसे छिपा ले ।
स्वयं करेंगे लोग , ज़ल्द इनके' मुँह काले '।।"


"पाले में इकओर हैं ,जन सामान्य महान् ।
दूजे पाले में जुटे , सब के सब बेइमान ।।
सब के सब बेइमान , ज़ंग को छेड़ दिए हैं ।
जाति पन्थ को भूल , सभी को एक किये हैं ।।
जीतेंगे हम ज़ंग , संग 'अच्छे मन वाले' ।
पी . एम . कहें ग़रीब ,सभी हैं 'मेरे पाले' !!"
विशेष ....
' पी .एम. '.. प्रधानमंत्री ।
'काली टैली '...काले हिसाब वाली सूची ,काली सूची ।
'मुँह काले' .... मुहाबरा ,जनता द्वारा तिरस्कृत ।
'अच्छे मन वाले '....देशभक्त ईमानदार ,स्वच्छ मनवाले।
'मेरे पाले '.....मेरे पक्ष में ,मेरे द्वारा पोषित किये हुये ।



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