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34. " अब तो कुछ होने वाला है । "
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' सन् 2020 तक पाकिस्तान पूरे भारत पर कब्ज़ा कर लेगा । " .........पाकिस्तान के नवनियुक्त सेनाध्यक्ष 'वाजवा '

"प्रत्येक मुस्लिम को आतंकवादी होना चाहिये ।" ....सर्वाधिक सम्मानित इस्लामी धर्मशास्त्री 'जाकिर नाइक '

उक्त दोनों वक्तव्यों की प्रतिक्रिया में आज की मेरी पोस्ट प्रस्तुत है .......

"जिन्ना के वारिस 'कहते हैं ,हँसकर पाकिस्तान लिया है ।
लड़कर हिंदुस्तान समूचा , लेंगे यह एलान किया है '।।
लगता भूले 'वंगयुद्ध ' में , जो थी मार इन्होंने खाई ।
'एक लाख 'ने शस्त्र सहित जब ,'नाक रगड़ कर 'जान बचाई ।
उन्हीं सियारों ने सिंहों से ,लड़ने का फिर भ्रम पाला है ।।
अब तो कुछ होने वाला है !!
' बाबर के गुलाम ' भारत की ,छाती पर हैं मूंग दल रहे ।
'दिल्ली पर कब्ज़ा 'करने को ,दाँव पेंच सब कुटिल चल रहे।।
राजसभा में 'मानसिंह के ,अनुगामी ' घुसपैठ रहे हैँ ।
बेटी बहिन सौंप दुश्मन को , कायर मूंछें ऐंठ रहे हैं ।।
' सिंहश्रेष्ठ के वंशधरों ' का ,क्षुब्ध हुआ दीखे 'भाला' है ।
अब तो कुछ होने वाला है !
सूरज का मुख बहुत लाल है ,क्षुब्ध चाँदनी में ज्वाला है ।
अब तो कुछ होने वाला है !!


विशेष .......
" जिन्ना के वारिस "... भारतीय उपमहाद्वीप के वे
समस्त मुसलमान जो भारत राष्ट्र् की सामूहिक सांस्कृतिक पहिचान को नकारते हुये समस्त मुसलमानों को एक अलग राष्ट्र् (सांस्कृतिक समूह )मानने का दुराग्रह पाले हुये हैं और भारत विभाजन के पूर्व से संपूर्ण भारत के इस्लामीकरण का प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष अभियान चलाये हुये हैं ।
"वंगयुद्ध" ... सन् 1971में पाकिस्तान ने तीसरी बार
भारत पर हमला किया , अमरीका और चीन के समर्थन के बावजूद मात्र 15 दिन की घमासान लड़ाई में लगभग एक पाकिस्तानी सेना ने 6 मास के लिये पर्याप्त गोला बारूद के रहते हुये भी भारतीय सेना के पराक्रम और वीरता से घबरा कर विना शर्त समर्पण कर दिया और पूर्वी पाकिस्तान वंगला देश बन गया ।
इसके बाद शेष पश्चिमी पाकिस्तान ( वर्तमान पाकिस्तान ) के प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो ने 'शिमला समझौता ' के तहत भारत की तत्कालीन
प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सामने के सामने गिड़गिड़ाकर माफ़ी
माँगते हुए सभी सैनिकों को छोड़ने की प्रार्थना की । इंदिरा जी ने
दयार्द्र होकर सभी सैनिकों को छोड़ दिया, किन्तु पाकिस्तान वापस पहुँचते ही उन्होंने ने भारत से बदला लेने के लिए एक हजार
साल तक लड़ने का ऐलान कर दिया । यहाँ उसी की ओर संकेत
किया गया है ।
" बाबर के गुलाम ".... जो भारतीय नागरिक भारत में जन्मे ,पले ,बढ़े हैं ,किन्तु भगवान् राम ,कृष्ण आदि को अपना पूर्वज अस्वीकार करते हैं और एक विदेशी हमलावर , जिसने भारत के जर जोरू जमीन को निर्ममता पूर्वक लूटा और यहाँ विदेशी शासन (मुग़ल वंश का इस्लामी शासन ) स्थापित किया ,
को अपना श्रद्धेय पूर्वज मानने की घोषणा करके राम ,कृष्णऔर शिव के प्रसिद्ध ऐतिहासिक मंदिरों के स्थान पर बाबरी
स्मारक स्थापित करने का अभियान चलाये हुये हैं और शेष इस अभियान का सक्रिय समर्थन कर रहे हैं ।
"मानसिंह के अनुगामी" ... वे गद्दार कथित भारतीय जो
कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश सहित समस्त भारत को एक अखण्ड राष्ट्र् के रूप में स्वीकार नहीं करते हैं । जिनमें कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह और फ़ारुख़ अब्दुल्ला आदि प्रमुख हैं
समय समय पर पाकिस्तान के पक्ष में बयान देते रहते हैं ।।
"सिंहश्रेष्ठ के वंशधरों ."..... अभिधेय अर्थ महाराणा के
के वंशज ,किन्तु यहाँ समस्त देशभक्त भारतीय नागरिक अर्थ व्यंजित हो रहा है ।
"भाला "..... अस्त्र शस्त्र का प्रतीक वर्तमान में परमाणु बम
मिसाइल आदि ।


35. "सूर्य करेंगे अस्त ,क्रुद्ध सब आउल कहते ।"
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" प्रधानमंत्री डरे हुये हैं ,वह उन्हें बोलने नहीं दे रहे हैं , क्योंकि उनके निजी भ्रष्टाचार की मेरे पास पुख्ता जानकारी है । " ........राहुल गान्धी ,कांग्रेस उपाध्यक्ष
दिनान्क 14.12.2016 को संयुक्त विपक्ष की कांफ्रेंस में दै.जाग . 15.12.2016 अर्थात् आज "अन्योक्ति' ...मेरी प्रतिक्रिया "
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" कहते 'आउल -किंग' हैं ,मेरे पास सबूत ।
सूर्योदय जब से हुआ , चली गई है धूप ।।
चली गई है धूप , सूर्य दोषी है पूरा ।
' दृष्टिहीनता ' बढ़ी ,न दीखे काला भूरा ।
चमगादर भी संग, 'फेयर 'को 'फाउल' कहते।
सूर्य करेंगे अस्त, क्रुद्ध सब 'आउल 'कहते।।"
विशेष .......
'आउल किंग' .. उलूक राज , उल्लुओं का राजा ,उल्लुओं
और चमगादारों को दिन में दिखाई नहींदेता है,
अतः सूर्योदय और सूर्य से इनकी दुश्मनी है ।
'दृष्टिहीनता '... अन्धापन ,दिनौंधी ।
' फेयर .'.......उचित ,विवेकसम्मत ।
'फाउल.'.......अनुचित ,विवेकहीन ।


36."हिब्बल कहते कैशलेस ,शरियत के प्रतिकूल ।"

'आउल कांगेस 'के एक प्रमुख नेता ,पूर्व केन्द्रीय मंत्री, समस्त राष्ट्रीय अपराधियों ( आतंकवादियों ,लुटेरों के विधिक पैरोकार )के
के उच्चतम अधिवक्ता का तर्क है कि 'नोटबंदी ' से मुसलमान विपरीत प्रभावित हो रहे हैं ,क्योंकि वे अपनी शरीयत के आदेश के अनुरूप 'सूदखोरी के कारण' बैंक में खाता ही नहीं खोलते हैं ।
उनके इस बयान को समस्त सेकुलर दलों और मौलानाओं का मौन और मुखर सक्रिय समर्थन प्राप्त है ।
इसी पृष्ठभूमि में मेरी आज की पोस्ट प्रस्तुत है .....


"नोटों की बन्दी नहीं , 'संविधान -अनुकूल' ।
' हिब्बल'कहते 'कैशलेस ', शरियत के प्रतिकूल ।।
'शरियत' के प्रतिकूल , बैंकिंग ही है सारी ।
सच्चा मुस्लिम नहीं , बन सके खाता -धारी।।
असली चिन्ता इन्हें , 'लूट' मुस्लिम वोटों की।
अतः वापसी माँग ,रहे 'बन्दी नोटों की ।।"
विशेष ....
संविधान-अनुकूल ...संविधान के अनुकूल ।
' हिब्बल '......सेकुलर दलों को संस्कृत -संस्कृति से स्थाई
बैर है । इनकी फ़ारसी ,अरबी और उर्दू में विशेष
आस्था है ।और फ़ारसी में 'स 'के स्थान पर 'ह'
का उच्चारण किया जाता है ।जैसे 'सप्ताह' के
स्थान पर 'हप्ताह '।
अतः हिब्बल से आशय स्पष्ट हो जाना चाहिये ।
'बन्दी नोटों की '.... 'नोटबंदी '
' लूट ...'.... अरबों खरबों का काला धन के रूप में
सामान्य जनता के शोषण से की गई लूट ।



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