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समस्या क्या है, कहाँ है ? उत्तर देना दायित्व है !

कमीने पन की नई नई दास्तानें सामने आ रही है । हाँ, जहां से आनी अपेक्षित हैं वहीं से आ रही हैं । अभी जनता शॉक भी नहीं हो रही, और लगता है जल्द ही केजरिया और कंपनी कमीनेपन का नया अध्याय पूरे बेशर्मी से खुलकर सिखाना शुरू कर देंगे । जनता अभी केंद्र से आस लगाकर बैठी है तथा उनके पुरोधा दलों से आस लगाकर बैठी है । लेकिन सनद रहे, जनता हमेशा तगड़े घोड़े का साथ देती है । नपुंसक की पत्नी पतिव्रता नहीं रहती और अगर वो नपुंसक पति, अपनी पत्नी को कुलटा कहे तो उसका सरेबाजार ऐसे मुंह नोचती है कि वो किसी को मुंह दिखाने के काबिल नहीं रहता। यह शाश्वत सत्य है, आज के जमाने का नहीं ।

खैर, नेतृत्व को दोष देकर कुछ नहीं होगा, समाज को खुद ही कुछ करना होगा । जहां हम अपने विरोधियों को देखते हैं, उनके यहाँ पक्के चक्रव्युह से बने हैं , और व्यूह का हर चक्र अपने अंदरूनी चक्र से पोषित है तथा उसका संरक्षण करता है । फिर समस्या यह दिखाई देती है कि हमारे यहाँ इस बात की समझ तो लोगों को है - कम से कम ऐसे बताते तो हैं जब बात करें - आप जानते ही क्या हैं हमें क्या पता होता है ? नहीं भाई हम यह नहीं जानते आप को क्या पता है, लेकिन पता है तो परिणाम क्या है ? बाकी इतना कह दूँ कि संवाद साधने का प्रयास बहुत किया लेकिन .... रहने दीजिये, कुछ नया नहीं किसी के लिए । एक पक्की योजना है जिससे सभी सहमत है कि हाँ, यह बिलकुल कार्यान्वित करने जैसी है, यह हो सकता है, खर्चा भी समझ में आता है । बस कौन करेगा उसका उन्हें पता नहीं । उनके पास समय नहीं ।

वैसे आप को पता है, तलवार के साथ लकड़ी से लड़ना बेकार और गोली के सामने तलवार भी बेकार । हथियार का upgrade जरूरी है । दो लोगों के नाम बताता हूँ, इस सदी के कमीनोत्तम हैं । उनकी किताबें भी मुफ्त मिलती हैं, अब कम से कम उन्हें सर्च करने का कष्ट कीजिये । लिंक मांगनेवालों को मेरा जवाब वही है जो रामधीर सिंह का था - तुमसे न हो पाएगा । Gene Sharp और Srdja Popovic । समझिए उनके व्यूह, वामिए उनको ही पढ़ते हैं । गांधीजी को अहिंसा का योद्धा मानता है Gene Sharp; इससे समझ जाइए ।

बाकी दुआ सलाम होती रहेगी । इन्हें पढ़नेवालों से नित्य संपर्क बनाए रखना मेरे लिए खुशी की बात होगी । हाँ, पहले परिच्छेद की बात दोहराता हूँ ताकि कोई भूले नहीं - सनद रहे, जनता हमेशा तगड़े घोड़े का साथ देती है । नपुंसक की पत्नी पतिव्रता नहीं रहती और अगर वो नपुंसक पति, अपनी पत्नी को कुलटा कहे तो उसका सरेबाजार ऐसे मुंह नोचती है कि वो किसी को मुंह दिखाने के काबिल नहीं रहता। यह शाश्वत सत्य है, आज के जमाने का नहीं ।

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