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पहले का भाग यहाँ पढ़ें आस्था-के-प्रतिमान-१-२

आस्था के प्रतिमान-३

"अब हिंदी फिल्में धर्म की दिशा तय करने लगी।"

आपके देवता कोई काल्पनिक बकवास नहीं हैं एक #energetic_reality ऊर्जात्मक सत्य हैं। आपके #DNA में उनका अंश है। आप सही विधि से उनके लिए अनुष्ठान द्वारा आप उनसे संबंध स्थापित कर सकते हैं, और लाभान्वित हो सकते हैं।

जबकि #साईं या #दरगाहों में गड़े #मुर्दे सिर्फ #प्रेत हैं। यदि क्षणिक लाभ के चक्कर में आप इन प्रेतों को पूजते हैं तो सर्वप्रथम तो अपने पितृगणों के दोषी होते हैं क्योंकि आपके पितृ एक ओर देवताओं के साथ संयुक्त होते हैं तो दूसरी ओर आपसे। आप यदि सही ढंग से अपना धर्म पालन करते हैं तो आपके पितृ पुष्ट होकर देवताओं को आपके प्रति उदार होने के लिए प्रेरित करते हैं।

दरगाह व साईं इत्यादि प्रेत पिशाचों के पूजन से उस व्यक्ति के पितृ पतित होकर इन प्रेतों पिशाचों के गुलाम हो जाते हैं। इससे वे दुखी होकर इस पतन के जिम्मेदार को #श्राप देते हैं।

दूसरी ओर देवताओं से संपर्क टूट जाने के कारण वे ऐसे व्यक्ति और परिवार से उदासीन हो जाते हैं।

"पतित पितृ, रुष्ट देवता और आसपास प्रेत पिशाचों का जमघट.... ये आपकी साईं या दरगाह भक्ति का #पुरस्कार है।जो आनेवाली पीढ़ियों को भी सर्वनाश के पथ पर लाएगा।"

सोचिए कितना बड़ा मूल्य है कितने भयानक पतन के लिए!!!

शिर्डी से चली पाखंड श्रंखला की हद तो तब हुई जब पुट्टपर्ती आंध्रप्रदेश में इनका एक अवतार भी हो गया #सत्यसांई... तेंदुलकर का भगवान...।

अब अपने तो तेंदुलकर माई बाप हैं #शंकराचार्य से अपने क्या काम???

सत्य साँई सिर्फ जादू के खेल दिखाते थे, इसीलिए वहाँ पीसी सरकार जैसे महान जादूगर को आने नहीं दिया था,एक बार के बाद।

"भूखे नंगों का भगवान सिर्फ अन्न कपड़ा होता है वो जहाँ मिले ये सिर झुका देते हैं।"

सत्य साँई ने बाजीगरी को सिद्धि बता कर खूब माल कूटा और फ्री महाविद्यालय, अस्पताल, अन्नक्षेत्र इत्यादि चला कर पैठ जमा ली।

विदेशियों ने आना शुरु किया तो मूढ़ हिंदुओं ने तो आँखें मूँदकर अवतार मान लिया।

अब पोलें खुल रही हैं कि मूल स्वरूप ही गड़बड़ था....तो सत्य साँई का पाखंड वैसे ही ध्वस्त हो जाता है।पर साँई के गधे इसे भी नहीं मानेंगे।

सत्य साँई ने अपनी महासमाधि का जो वक्त बताया था उससे कई साल पहले निपट गए.... पर क्या फर्क पड़ता है???
बोध होता तो अपनी मूल संस्कृति को समझते, फिल्मी भगवानो के पीछे नहीं घूमते।

वैसे इनका अभी एक #तीसरा_अवतार भी होगा.....

#प्रेमसाँई ..... उसकी भविष्यवाणी 2030 के आसपास की है पर साँई का मार्केट इतना गर्म है कि अभी ही "4 प्रेम साँई" भारत भूमि पर विचर रहे हैं जिनमें से एक आसारामपुत्र #नारायण_प्रेमसाँई है .... ।
अब देख लो आप ही क्या #स्तर है???

एक प्रेमसाँई से तो मैं खुद मिल चुका हूँ और कसम से इस कदर #Ch2So4 लगा मुझे वो आदमी कि बहुत मुश्किल से उसे सूतने से खुद को रोक पाया मैं।

इनके भक्त भी इनको भगवान मानते हैं....
कल को वो भी हमारे मंदिरों में इनकी मूर्तियां लगाना चाहेंगे... तब????

आप का #धर्म है या #बस_स्टैंड का #मूत्रालय?????जहाँ कोई भी #बवासीर और #नामर्दी दूर करने के #पोस्टर चैंप जाता है?????*

#अज्ञेय


आस्था के प्रतिमान-४

सांई के भक्त अधिकतर शिर्डी संस्थान से प्रकाशित सांई चरित्र नहीं पढ़े हुए हैं।

उसमें कहीं नहीं लिखा सांई ने वैदिक मंत्र बोले।

हाँ उनके ईद पर कुर्बानी देने, नमाज़ पढ़ने, गंगा जल से नफरत करने और ब्राह्मणों के प्रति दुराग्रह के सबूत अवश्य हैं।

मनोज कुमार की फिल्म और रामानंद सागर के सीरियल से एक छवि गढ़ी गई और सेकुलर भगवान का अवतरण हो गया।

सांई भक्ति #इस्लाम कबूलने की #KG है।वहाँ से धीरे धीरे #दरगाह_पूजन आरंभ होता है।कोई सूफी बाबा साहब मुर्शिद या गुरु हो जाते हैं।प्रेम से एक एक दो दो रोज़े रखवाए जाते हैं और फिर....
#खचाक्।

आत्मबल विहीन आध्यात्मिक तौर पर भूखे नंगे ही सांई भक्त मिलेंगे आपको।ये दे दो...वो दे दो...दुखी हैं मेहर कर दो।

इसके आगे कोई तत्व चिंतन सुना कभी सांई भक्तों का या कोई ज्ञान दिया सांई ने???

उलटा वे तो गायत्री साधना, तपस्या और तीर्थ सेवन का उपहास करते थे।

अगर साध्वी प्राची या उमा भारती जैसे भाजपा नेता खुलकर विरोध नहीं करते हैं,बल्कि समर्थन तक करते हैं तो समझने की कोशिश कीजिए।
गलती साध्वी प्राची या उमा भारती की नहीं है। इन लोगों की शक्ति सत्ता है।सत्ता वोट से मिलती है।वोट इनके सिर्फ हिंदू हैं।खतने इनको कभी वोट नहीं देंगे। हिंदू जनता की आवाज संसद में उठाने के लिए इन लोगों को अप्रिय निर्णय भी करने पड़ते हैं।
अभी हिंदुओं का हाल ऐसा है जैसे बिना बाप की जवान छोरियाँ।कोई धणी धोरी नहीं।किसी का अनुशासन स्वीकार नहीं।
मनमानी भक्ति हो रही है। मीडिया अलग आग में घी डाल रहा है।फिल्में और सीरियल अलग। फिल्मों और सीरियलों से दीक्षित ये बुद्धिहीन भेड़ समुदाय अपने धर्म को लेकर इतना कन्फ्यूज़ है कि सनातन की सर्वोच्च आचार्य पीठ से प्राप्त निर्देश को अपनी निजता का हनन मानता है और कपड़ा लपेटे दरगाहों में नाक रगड़ता है।

"हिंदू औरतें श्मशान में नहीं जाती फिर दरगाह में तो बिना जला शरीर सड़कर मिट्टी हुआ है।इनको प्रेत और देव का भेद ही नहीं पता।"

यदि आप अपने धर्म में निषिद्ध स्थानों पर जाएंगे और दुराग्रह पूर्वक बहस कर अपने को सही भी सिद्ध करेंगे तो आपके वोट की संख्या देखते हुए आपका नेता आपको समझाने का जोखिम नहीं उठाएगा।वो बेमन से आपके साथ हो जाएगा।क्योंकि शंकराचार्य समझाने आते हैं तो उनकी तस्वीरों पर आप सांईभक्त हिंदू जूते बरसा कर,चूड़ियाँ फेंक कर "श्रद्धा और सबूरी" का बेहतरीन उदाहरण देते हैं।

तो..... अकाट्य सत्य स्वीकारें "नेता हममें से ही आता है।न टपकता है, न ऊगता है।"

#अज्ञेय

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