हिन्दी English
      आदरणीय लेखक श्री भगवान सिंह को पढ़ने के लिये यहाँ क्लिक करें.      इस साईट पर विजिट करने के लिये धन्यवाद ! आपका रीडराइटहियर.कॉम पर हार्दिक स्वागत है.      अपना सन्देश यहाँ दिखाने के लिये हमसे सम्पर्क करें.      अपने प्रिय लेख पढने के लिये लॉग इन अवश्य करें, पढने पर भी आपको अंक प्राप्त होते है.      राष्ट्रवादी कवि डॉ अशोक शुक्ला को पढ़ने के लिये यहाँ क्लिक करें.
I am learning everyday and a school student, writes occasionally too.
अ-788
प-156
टि-33
सा-225
फा-210


तमिलनाडु राज्य की मुख्यमंत्री तथा ताकतवर आयरन  महिला राजनेत्रियों में से एक जे. जयललिता का 5 दिसंबर 2016 दिन सोमवार की रात को चेन्नई के अपोलो अस्पताल में निधन हो गया। वह 68 वर्ष की थीं। जयललिता को 4 दिसंबर 2016 दिन  रविवार शाम दिल का दौरा पड़ा था।  जयललिता ने 5 दिसंबर 2016 दिन  सोमवार साढे 11 बजे आखरी सांस ली। जयललिता के निधन के बाद अस्पताल के बाहर अम्मा को समर्थकों की संख्या बढ़ती जा रही थी। जिसकों काबू में रखने के लिए पुलिस व सेना को तैनात कर दिया गया था। 

जे. जयललिता की कुछ महत्वपूर्ण बाते

वर्ष 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद राज्य में हुए चुनावों में उनकी पार्टी ने कांग्रेस के साथ चुनाव लड़ा और सरकार बनाई। वे 24 जून 1991 से 12 मई तक राज्य की पहली निर्वाचित मुख्‍यमंत्री और राज्य की सबसे कम उम्र की मुख्यमंत्री रहीं।

वर्ष 1992 में उनकी सरकार ने बालिकाओं की रक्षा के लिए 'क्रैडल बेबी स्कीम' शुरू की ताकि अनाथ और बेसहारा बच्चियों को खुशहाल जीवन मिल सके। इसी वर्ष राज्य में ऐसे पुलिस थाने खोले गए जहां केवल महिलाएं ही तैनात होती थीं।

1996 में उनकी पार्टी चुनावों में हार गई और वे खुद भी चुनाव हार गईं। इस हार के बाद सरकार विरोधी जनभावना और उनके मंत्रियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के कई मामले उजागर हुये। पहली बार मुख्यमंत्री रहते हुए उनपर कई गंभीर आरोप लगे। उन्होंने कभी शादी नहीं की लेकिन अपने दत्तक पुत्र 'वीएन सुधाकरण' की शादी पर पानी की तरह पैसे बहाए। यह विषय भी इन मामलों का एक हिस्सा रहा।

भ्रष्टाचार के मामलों और कोर्ट से सजा होने के बावजूद वे अपनी पार्टी को चुनावों में जिताने में सफल रहीं। हालांकि गंभीर आरोपों के कारण उन्हें इस दौरान काफी कठिन दौर से गुजरना पड़ा, पर 2001 में वे फिर एक बार तमिलनडू की मुख्यमंत्री बनने में सफल हुईं। उन्होंने गैर चुने हुए मुख्यमंत्री के तौर पर कुर्सी संभाल ली। दोबारा सत्ता में आने के बाद उन्होंने लॉटरी टिकट पर पाबंदी लगा दी। हड़ताल पर जाने की वजह से दो लाख कर्मचारियों को एक साथ नौकरी से निकाल दिया, किसानों की मुफ्त बिजली पर रोक लगा दी, राशन की दुकानों में चावल की कीमत बढ़ा दी, 5000 रुपये से ज्यादा कमाने वालों के राशन कार्ड खारिज कर दिए, बस किराया बढ़ा दिया और मंदिरों में जानवरों की बलि पर रोक लगा दी। इसी बीच भ्रष्टाचार के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी नियुक्ति को अवैध घोषित कर दिया और उन्हें अपनी कुर्सी अपने विश्वस्त मंत्री ओ० पन्नीरसेल्वम को सौंपनी पड़ी। जब उन्हें मद्रास हाईकोर्ट से कुछ आरोपों से राहत मिल गई तो वे मार्च 2002 में फिर से मुख्यमंत्री की कुर्सी सँभाल ली। हालांकि 2004 के लोकसभा चुनाव में बुरी तरह हारने के बाद उन्होंने पशुबलि की अनुमति दे दी और किसानों की मुफ्त बिजली भी बहाल हो गई।

अप्रैल 2011 में जब 11 दलों के गठबंधन ने 14वीं राज्य विधानसभा में बहुमत हासिल किया तो वे तीसरी बार मुख्यमंत्री बनीं। उन्होंने 16 मई 2011 को मुख्‍यमंत्री पद की शपथ लीं और मृत्र्योपर्यन्त तक अर्थात 5 दिसंबर 2016 तक तमिलनाडु की मुख्य मंत्री रहीं।

टिप्पणी

क्रमबद्ध करें
नवीनतम प्राचीनतम

आगे जारी रखने के लिए कृपया लॉग इन करें.
© C2016 - 2025 सर्वाधिकार सुरक्षित