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ओसामा सा अन्त , सुनिश्चित समझो अपना
" इन्शा अल्लाह सन् 20 35 तक हम पूरे बचे हुये हिंदुस्तान से सभी काफिरों को ख़त्म करके लाल किले पर इस्लामी झण्डा फ़हराने में जरूर कामयाब हो जायें गे । वैसे यह टारगेट 2 030 तक ही पूरा हो जाता , लेकिन बीच में बदकिस्मती से मोदी रोड़ा बन कर अटक गया है । लेकिन हम अपने हिंदुस्तानी भाईयों की मदत से हर हालत में इसको अपने रास्ते से 2019 तक जरूर हटाने में कामयाब हो जायेंगे" .... "बम्बई हमले का मास्टर माइन्ड आतंकवादी हाफिज सईद " ( पाकिस्तान के लाहौर में गत सप्ताह दिए गए भाषण से)

" अबकी बार , मुस्लिम सरकार ।" .... "मन्त्री आजम खान "

संयोग है अथवा किसी संयुक्त योजना के तहत इन दोनों
वक्तव्यों का समय प्रायः समान है । अतएव अपनी पूर्व पोस्ट के
क्रम में मैं आज की पोस्ट उक्त दोनों वक्तव्यों को ध्यान में रखते
हुये अपनी प्रतिक्रिया प्रस्तुत कर रहा हूँ ....

" इस्लामी साम्राज्य ' का ,व्यर्थ न देखो स्वप्न ।
निश्चित ही दुःस्वप्न यह , गहरे होगा दफ़्न ।।
गहरे होगा दफ़्न , तुम्हारा यह सुख सपना ।
'ओसामा सा अन्त ' , सुनिश्चित समझो अपना।।
हम तुम दोनों एक , वन्धु मत बनों 'हरामी '।
पूर्वज रहे समान , हिंदु हम , तुम इस्लामी।।"


विशेष ....
इस्लामी साम्राज्य ..... इसलामी विश्वास के अनुसार इस दुनिया
को बहुत शीघ्र ही इस्लामी हुकूमत के नियंत्रण में आ जाना है ,दुनिया के किसी भी कोने में जन्मे और निवास कर रहे
प्रत्येक मुस्लिम का यह अनिवार्य खुदाई कर्तव्य है कि वह जहाँ कहीं भी हो वहीँ से काफिरों को ख़त्म करके पूरे विश्व में उस
अल्लाह की हुकूमत को कायम करने में मदद करे । सारे विश्व में बढ़ते हुये इस्लामी आतंवाद की जड़ में यही विचार कारण बना
हुआ है ।
ओसामा सा अन्त .... अलकायदा का संस्थापक 'ओसामा बिन
लादेन ' ने अमेरिका के 'वर्ल्ड ट्रेड सेण्टर ' को योजना बना
कर अपने संगठन के सदस्य आतंकवादियों के द्वारा 2001 के 11 सितम्बर को ढहा दिया था । उसके बाद पाकिस्तान ने ओसामा को अपनी सेना के संरक्षण में मिलिट्री के बेस कैम्प में
सुरक्षित छिपा लिया और दूसरी ओर अमरीका का आतंकवाद के खिलाफ जंग में मुख्य सहयोगी के रूप में अमरीका से हर वर्ष अरबों डॉलर की सैनिक साजोसामान की निरन्तर सहायता भी लेता रहा अन्त में लगभग एक दशक तक पाकिस्तान की दोहरी भूमिका पर अमरीका को शक हो गया । तब अपनी खुफिया एजेंसी की सहायता से पाकिस्तान को विश्वास में लिए बिना सीधे ओसामा की शरणस्थली का पता लगाकर उसको उसके निवास पर ही हमला करके मार गिराया और उसकी लाश
को एक ताबूत में बंद करके अन्ध महासागर में ले जाकर हजारों मीटर की गहराई में डुबो दिया था ।
यहाँ हाफ़िज सईद को उसी प्रकार की मौत को याद कराया गया है ।
हरामी ....?

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